त्योहारी सीजन के बीच देश के लाखों रेल कर्मचारियों के लिए बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। ईटी की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आगामी बुधवार को होने वाली बैठक में रेलवे कर्मचारियों के लिए उत्पादकता-आधारित बोनस (पीएलबी) के प्रस्ताव पर विचार किए जाने की संभावना है। यदि कैबिनेट इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो रेलवे के गैर-राजपत्रित कर्मचारियों को सालाना बोनस मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। हालांकि, कैबिनेट में प्रस्ताव पर चर्चा होना ही बोनस की अंतिम स्वीकृति या निश्चित राशि की पुष्टि नहीं करता है।
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय कैबिनेट बुधवार को रेलवे कर्मचारियों को दिए जाने वाले वार्षिक उत्पादकता आधारित बोनस पर विचार करने जा रही है। यह बोनस रेलवे परिचालन में कर्मचारियों की कार्यकुशलता और बेहतर प्रदर्शन को प्रोत्साहित करने के लिए हर साल दिया जाता है। हालांकि, इस प्रस्ताव के विस्तृत ब्यौरे और सरकार के अंतिम फैसले की जानकारी कैबिनेट बैठक संपन्न होने के बाद ही सामने आ सकेगी।
वेतन सीमा में पिछले कई वर्षों से कोई बदलाव न होने के कारण रेल कर्मचारी संगठनों में संशोधन की मांग तेज हो गई है। 'इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन' (आईआरटीएसए) ने सरकार से बोनस गणना का दायरा बढ़ाने की सिफारिश की है। संगठन की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
कैबिनेट की बैठक की खबरों के बीच सोशल मीडिया पर बोनस को लेकर एक फर्जी पत्र भी वायरल हो गया था। 6 अक्तूबर की तारीख वाले इस जाली पत्र में दावा किया गया था कि सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 78 दिनों के बोनस के रूप में 41,149 रुपये की मंजूरी दे दी है।
बुधवार को होने वाली कैबिनेट बैठक पर पूरे देश के रेल कर्मचारियों की नजरें टिकी हुई हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या सरकार पुरानी 7,000 रुपये की सीलिंग पर ही 78 दिनों का बोनस मंजूर करती है या कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही सीलिंग बढ़ाने की मांग पर कोई सकारात्मक रुख अपनाती है।