आज देश का बजट आने वाला है। भारत के प्रत्यक्ष कर ढांचे में बीते कुछ समय में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखा गया। केंद्र सरकार द्वारा नई टैक्स व्यवस्था को 'डिफ़ॉल्ट' बनाने और इसे लगातार आकर्षक बनाने के कदमों का असर अब आंकड़ों में साफ दिखने लगा है। वित्त मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 (आकलन वर्ष 2024-25) के लिए फाइल किए गए कुल आयकर रिटर्न (आईटीआर) में से लगभग 72% करदाताओं ने नई टैक्स व्यवस्था को चुना है। अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में पुरानी टैक्स व्यवस्था के अंत की शुरुआत होगी?
पुरानी टैक्स व्यवस्था के स्लैब (60 वर्ष से कम आयु के लिए)
इसके साथ ही, पिछले बजट में वेतनभोगियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाकर ₹75,000 कर दिया गया था, जिससे ₹12.75 लाख तक की आय वाले वेतनभोगी करमुक्त हो सकते हैं। अब वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार इसमें कोई बदलाव करती है या नहीं, इस पर सबकी नजर रहेगी।
पुरानी व्यवस्था का भविष्य: क्या यह आखिरी चरण है?
पुरानी टैक्स व्यवस्था में पिछले कई वर्षों से स्लैब और दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। जहां नई व्यवस्था में 30% का उच्चतम टैक्स रेट ₹24 लाख के बाद शुरू होता है, वहीं पुरानी व्यवस्था में यह मात्र ₹10 लाख के बाद ही प्रभावी हो जाता है। हालांकि, सरकार ने अभी तक पुरानी व्यवस्था को बंद करने की किसी 'सनसेट डेट' (अंतिम तिथि) की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन जिस तरह से नई व्यवस्था को डिफॉल्ट बनाया गया है और पुरानी व्यवस्था को स्थिर रखा गया है, उससे संकेत मिलता है कि आने वाले वर्षों में यह अप्रासंगिक हो सकती है।
क्या करदाताओं के लिए आगे की राह होगी और आसान?
72% करदाताओं का नई व्यवस्था की ओर शिफ्ट होना इस बात का प्रमाण है कि लोग अब जटिल निवेश आधारित कटौती (80C, 80D) के बजाय कम दरों और सरल अनुपालन को प्राथमिकता दे रहे हैं। यदि आप भी पुराने निवेशों और कटौती के लाभों में फंसे हैं, तो वित्त वर्ष 2026-27 आपके लिए अपनी टैक्स प्लानिंग पर पुनर्विचार करने का महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है। इस के बजट में देखने वाली बात यह होगी कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपने बजट भाषण में करदाताओं के लिए आगे की राह और आसान करने वाली हैं या नहीं।