साल 2026 के रक्षा बजट में कुल 15 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। रक्षा मंत्रालय के लिए वर्ष 2026-27 के लिए 78 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। यह आवंटन अगले वित्तीय वर्ष के अनुमानित सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का दो फीसदी है और वित्त वर्ष 2025-26 के बजटीय अनुमानों (बीई) की तुलना में 15.19% की महत्वपूर्ण बढोतरी है। कुल रक्षा बजट केंद्र सरकार के व्यय का 14.67% है, जो सभी मंत्रालयों में सबसे अधिक है।
वहीं रक्षा बलों के आधुनिकीकरण के लिए 21 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे। अपने बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि असैनिक, प्रशिक्षण एवं अन्य विमानों के निर्माण के लिए आवश्यक कलपुर्जों पर मूलभूत सीमाशुल्क में छूट दी जाएगी। जबकि रक्षा क्षेत्र की ईकाइयों द्वारा रख-रखाव, मरम्मत अथवा अन्य आवश्यकताओं में इस्तेमाल किए जाने वाले विमान के पुर्जों के निर्माण के लिए आयात किए जाने वाले कच्चे माल पर मूलभूत सीमाशुल्क में छूट दी जाएगी। पिछले साल मई महीने में पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहला बजट है। इस बजट में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सामने आईं कमियों को सुधारने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। वहीं रक्षा बलों को कैपिटल आउटले बजट के तहत आधुनिकीकरण के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे।
आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की ओर एक रणनीतिक बदलाव
सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और उनकी सामान्य जरूरतों को फाइनेंस करने के अलावा, यह काफी बढ़ा हुआ आवंटन ऑपरेशन सिंदूर के बाद कैपिटल और रेवेन्यू दोनों कैटेगरी में हथियारों और गोला-बारूद की इमरजेंसी खरीद से होने वाली फाइनेंशियल जरूरतों को भी पूरा करेगा। रक्षा बजट का एक बड़ा हिस्सा, जो ₹2.19 लाख करोड़ है, कैपिटल खर्च के लिए आवंटित किया गया है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 के बजट अनुमानों में ₹1.80 लाख करोड़ आवंटित किए गए थे। इस बढ़ी हुई व्यवस्था के जरिए, सरकार ने सशस्त्र बलों और उनकी क्षमताओं को उच्चतम वैश्विक मानकों के अनुसार बदलने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है, साथ ही आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की ओर एक रणनीतिक बदलाव भी किया है।
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तकनीक को और अधिक सुदृढ़ करना लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य भारत की रक्षा शक्ति और तकनीक को और अधिक सुदृढ़ करना है। यह कदम देश की सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम सेना तैयार करने के लिए उठाया गया है। अर्थव्यवस्था में रक्षा क्षेत्र को मजबूती देने का भी यह प्रयास है। वहीं बजट के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, 'रक्षा क्षेत्र की यूनिट्स द्वारा मेंटेनेंस, रिपेयर या ओवरऑल जरूरतों के लिए इस्तेमाल होने वाले एयरक्राफ्ट के पार्ट्स बनाने के लिए इंपोर्ट किए जाने वाले कच्चे माल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी से छूट देने का प्रस्ताव है।'
सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण - एक रणनीतिक उद्देश्य
मौजूदा भू-राजनीतिक परिदृश्य में, आधुनिकीकरण बजट में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी एक रणनीतिक आवश्यकता है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, तीसरी तिमाही तक, यानी दिसंबर 2025 तक, रक्षा मंत्रालय ने ₹2.10 लाख करोड़ के अनुबंध पूरे किए हैं और अब तक ₹3.50 लाख करोड़ से अधिक के लिए आवश्यकता की स्वीकृति अनुमोदन दिए हैं। पूंजीगत खरीद के तहत परियोजनाएं सशस्त्र बलों को अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान, स्मार्ट और घातक हथियार, जहाज/पनडुब्बी, मानवरहित हवाई वाहन, ड्रोन, विशेष वाहन आदि से लैस करेंगी।
रक्षा सिविल, रेवेन्यू और पेंशन का कैसा रहा बजट?
बता दें कि रक्षा मंत्रालय (सिविल) का बजट मामूली घटकर ₹28,554.61 करोड़ हो गया है, जिसमें 0.45% की कमी दर्ज की गई। इसके विपरीत, रक्षा सेवाओं (राजस्व) का बजट बढ़कर ₹3,65,478.98 करोड़ हो गया है, जो 17.24% की वृद्धि दर्शाता है। रक्षा पूंजीगत व्यय में सबसे अधिक 21.84% की बढ़ोतरी हुई है, जो ₹2,19,306.47 करोड़ तक पहुंच गया। वहीं, रक्षा पेंशन का आवंटन 6.53% बढ़कर ₹1,71,338.22 करोड़ हो गया है। कुल मिलाकर, बजट में रक्षा क्षमता और आधुनिकीकरण पर खास जोर दिखता है।
बजट में आत्मनिर्भरता पर जोर
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में रुकावटों और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने से आयात प्रतिस्थापन और स्वदेशीकरण की आवश्यकता को और मजबूत किया है, न केवल रखरखाव के लिए बल्कि भविष्य के आधुनिकीकरण के लिए भी। तदनुसार, घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए बजटीय नीति के माध्यम से धन आवंटित करने की रक्षा मंत्रालय की नीति को और मजबूत किया गया है। इस उद्देश्य के लिए, वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान घरेलू उद्योगों के माध्यम से खरीद के लिए ₹1.39 लाख करोड़, या पूंजीगत खरीद बजट का 75%, आवंटित किया गया है। धन का यह आवंटन घरेलू कंपनियों को उनके निवेश और सशस्त्र बलों की क्षमता विकास में उनकी बढ़ती भूमिका के बारे में आश्वस्त करता है। पूंजी अधिग्रहण के लिए बढ़ा हुआ आवंटन, खासकर घरेलू उद्योगों के लिए, देश की अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक सकारात्मक प्रभाव डालेगा और कई सहायक उद्योगों के विकास को बढ़ावा देगा, जिससे देश में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास पर विशेष जोर
सरकार ने बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) के लिए आवंटन बढ़ाकर सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। इसके अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में ₹7,146.50 करोड़ से बीआरओ के लिए बीई 2026-27 के तहत पूंजी के लिए बजट आवंटन बढ़ाकर ₹7,394 करोड़ कर दिया गया है। यह आवंटन सुरंगों, पुलों, हवाई अड्डों आदि जैसी कई रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण परियोजनाओं को पूरा करने में मदद करेगा, और सीमावर्ती क्षेत्रों में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी प्रदान करेगा, साथ ही क्षेत्रीय विकास और पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।
पूर्व सैनिकों के लिए स्वास्थ्य सेवा पर फोकस
सरकार पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) के लिए आवंटन बढ़ाकर पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है। वित्त वर्ष 2026-27 के सालाना बजट में, ईसीएचएस के लिए 12,100 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है, जो इस साल के बीई स्टेज के आवंटन से 45.49% ज्यादा है। इस आवंटन से पूर्व सैनिकों के मेडिकल ट्रीटमेंट से जुड़े खर्च (एमटीआरई) का फंड दिया जाएगा। पिछले पांच वर्षों में ईसीएचएस के लिए आवंटन में वित्त वर्ष 2021-22 के बीई स्टेज पर किए गए आवंटन की तुलना में 300% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।
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रक्षा क्षेत्र में रिसर्च और डेवलपमेंट को बढ़ावा
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के लिए बजटीय आवंटन वित्त वर्ष 2025-26 में 26,816.82 करोड़ रुपये से बढ़ाकर वित्त वर्ष 2026-27 में 29,100.25 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इस आवंटन में से, 17,250.25 करोड़ रुपये का एक बड़ा हिस्सा पूंजीगत खर्च के लिए आवंटित किया गया है।
रक्षा मंत्री ने बजट की सराहना
वहीं एक्स पर एक पोस्ट में, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया और कहा कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व में, विकसित भारत की ओर भारत की यात्रा को गति मिल रही है। उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भी ऐसे बजट पेश करने के लिए बधाई दी जो 'आकांक्षा को उपलब्धि में' और 'क्षमता को प्रदर्शन में' बदलने की कोशिश करता है। उन्होंने कहा कि यह 'युवा-संचालित बजट' आत्मनिर्भर और विकसित भारत के पीएम मोदी के विजन को और मजबूत करेगा।
बजट 2024-25 और 2025-26 में कैसा था बजट?
बजट 2024-25 में रक्षा क्षेत्र के लिए 6,21,940 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था। इस तुलना से स्पष्ट है कि 2025-26 में रक्षा बजट में लगभग 9.5% की वृद्धि की गई है, जो सेना के आधुनिकीकरण की निरंतरता को दर्शाता है। 2024 में, रक्षा मंत्रालय ने ₹1.26 लाख करोड़ का अब तक का सबसे उच्च स्वदेशी उत्पादन और ₹21,083 करोड़ का रक्षा निर्यात दर्ज किया था।
पाकिस्तान से कितना गुना ज्यादा है बजट
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रक्षा मद में 2.55 ट्रिलियन (2,550 अरब) पाकिस्तानी रुपये आवंटित किए हैं। भारतीय मुद्रा के हिसाब से यह महज ₹72,850 करोड़ होगा। जबकि भारत ने पिछले साल केवल एक हथियार के लिए करीब-करीब पूरे पाकिस्तान के रक्षा बजट के बराबर खर्च किया था। इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे पाकिस्तानी सरकार ने रक्षा बजट में 20% का इजाफा किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के साथ बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तानी सेना ने सरकार पर दबाव बनाया है। दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान का यह बढ़ा हुआ बजट भी भारत के पिछले साल के ₹6.81 लाख करोड़ के रक्षा बजट के सामने बेहद बौना है।
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