भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाने की दिशा में यह बजट एक निर्णायक कदम है। यह बजट संरचनात्मक सुधारों, रणनीतिक निवेश और आर्थिक विकास की समावेशी नीतियों पर जोर देता है। कृषि, एमएसएमई, निवेश और निर्यात पर ध्यान केंद्रित करके अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश की गई है। पूंजीगत खर्च में बढ़ोतरी व बुनियादी ढांचे के विकास, शहरी परिवर्तन और औद्योगिक आधुनिकीकरण पर जोर दिया गया है। प्रस्तावित दूसरी परिसंपत्ति मुद्रीकरण योजना नई परियोजनाओं के लिए 10 लाख करोड़ के मूल्य को अनलॉक करेगी, जिससे बुनियादी ढांचे के विकास को गति मिलेगी।
1.5 लाख करोड़ के परिव्यय के साथ राज्यों के लिए 50 वर्षीय ब्याज मुक्त ऋण योजना उच्च प्रभाव वाली परियोजनाओं में निवेश को बढ़ाएगी। एमएसएमई क्षेत्र को पर्याप्त बढ़ावा मिला है। बढ़ा हुआ क्रेडिट गारंटी कवर, निवेश सीमा व संशोधित वर्गीकरण मानदंड विकास प्रोत्साहन प्रदान करेंगे। स्टार्टअप्स के लिए फंड ऑफ फंड्स का विस्तार, जूते, चमड़े व खिलौना क्षेत्रों के लिए फोकस उत्पाद योजना छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। सूक्ष्म उद्यमों के लिए क्रेडिट कार्ड के विस्तार और स्टैंड-अप इंडिया योजना के तहत सावधि ऋण में वृद्धि से उद्यमिता और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा।
खपत बढ़ेगी...घरेलू मांग में भी आएगी तेजी
व्यक्तिगत आयकर ढांचे में बदलाव से मध्यम वर्ग को फायदा होगा। कर मुक्त आय सीमा 12 लाख करने से सीधे तौर पर खर्च करने योग्य आय में वृद्धि होगी। खपत बढ़ेगी और घरेलू मांग को बढ़ावा मिलेगा। संशोधित कर स्लैब सभी आय वर्गों में कम दरों के साथ आर्थिक भागीदारी और बचत को और प्रोत्साहित करेगा। करदाताओं के हाथों में अधिक पैसा देकर सरकार विकास, अधिक खर्च और बेहतर आर्थिक भावना का एक अच्छा चक्र सुनिश्चित कर रही है। इस बजट को मजबूत आर्थिक विस्तार के लिए डिजाइन किया गया है।