सरकार बजट में आरएंडडी, सेमीकंटक्टर विनिर्माण और हरित प्रौद्योगिकीयों को बढ़ावा दे सकती है। यह भारत को वैश्विक स्तर पर प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अलावा उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना और लक्षित सब्सिडी के जरिए स्टार्टअप, एमएसएमई और स्थानीय विनिर्माण का समर्थन करने वाली नीतियां मेक इन इंडिया पहल पहल को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता को करने में सहायक होंगी।
आगामी बजट में डिजिटल और तकनीकी विकास को आगे बढ़ाए जाने, डिजिटल बुनियादी ढांचे के लिए निवेश के साथ ग्रामीण इलाकों में इसकी पहुंच बनाने की मांग उद्योग कर रहा है। इस क्षेत्र से जुड़ी कंपनियो का कहना है कि आगामी बजट में आर्टिफशल इंटेलिजेंस (एआई) मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन और 5जी इंफ्रास्टक्चर जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करके भारत के डिजिटल और तकनीकी विकास को प्राथमिका दी जानी चाहिए। साथ ही वित्तीय साक्षरता और डिजिटल बुनियादी ढांचे के लिए निवेश को बढ़ावा देने की जरुरत है।
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भारत के डिजिटल और तकनीकी विकास बढ़ाने की जरूरत
एयर इंडिया के मुख्य वित्त अधिकारी आलोक दुबे कहते हैं, 'आगामी बजट में एआई, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन सहित 5जी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान देते हुए भारत के डिजिटल और तकनीकी विकास बढ़ाने की जरूरत है। इससे इस क्षेत्र को मजबूत करने और नए उत्पाद पेश करने को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही ग्रामीण भारत में डिजिटल का विस्तार करने में मदद मिलेगी। हमें उम्मीद है कि सरकार बजट में आरएंडडी, सेमीकंटक्टर विनिर्माण और हरित प्रौद्योगिकीयों को बढ़ावा देने के उपायों पर विचार करेगी, यह भारत को वैश्विक स्तर पर प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अलावा उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना और लक्षित सब्सिडी के जरिए स्टार्टअप, एमएसएमई और स्थानीय विनिर्माण का समर्थन करने वाली नीतियां मेक इन इंडिया पहल को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता को करने में सहायक होंगी। इसके अलावा टैक्स स्लैब को सरल बनाने तथा कौशल विकास में निवेश करने से यह क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ेगे। हमें आशा है सरकार डिजिटल परिवर्तन, स्थिरता और आत्मनिर्भरता पर अपना ध्यान बनाए रखेगी।'
स्टार्टअप को लिए विशेष फंडिंग पूल बनाने पर हो विचार
टर्बोस्टार्ट ग्लोबल के संस्थापक गणेश राजू बताते हैं कि भारत के स्टार्टअप को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव और पहचान की जरूरत है, इसके लिए सरकार को आगामी बजट कुछ उपाय करने की आवश्यकता है। देश ने सॉफ्टवेयर इनोवेशन में महारत हासिल कर ली है, वैल्यू क्रिएशन में अगली वेव यानी लहर हार्डटेक की आएगी। जटिल औद्योगिक, कृषि और स्वास्थ्य सेवा चुनौतियों को हल करने के लिए यह स्टार्टाअप सक्षम होंगे। इसलिए हम सरकार से यह अनुरोध करते हैं कि नई तकनीकों और इससे जुड़ी चुनौतियों के लिए आरएंडडी और स्टार्टाअप को लिए विशेष फंडिंग पूल बनाने पर विचार किया जाए, विशेष रूप से जो डीप टेक समाधानों पर काम कर रहे हैं उन पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि सरकार सेमीकंडक्टर डिजाइन, बायोटेक और एडवांस मटेरियल जैसे क्षेत्रों के लिए मेचिंग फंड यानी मिलान निधी की शुरुआत कर सकती है। इससे उन क्षेत्रों में निजी निवेश को जोखिम मुक्त करने में मदद मिलेगी जिसमें आमतौर पर लंबी अवधि होती है।
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जानकारों का कहना है भारत में सेमिकंडर, मोबाइल फोन के पुर्जों पर आयात शुल्क कम करने और वैश्विक निर्माताओं को अपने स्थानीय परिचालन को स्थापित करने और विस्तार करने के लिए आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन योजना शुरू करने जैसे कदम उठाएं है, बजट में भी इस क्षेत्र के लिए घोषणाएं की जा सकती है। जिसमें देश में मैन्युफेक्चरिंग को बढ़ावा मिले।