टेक अवंत-गार्डे के सीईओ अली सैत का के अनुसार, ‘इस बार के केंद्रीय बजट में सरकार को शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल बदलाव पर ध्यान केंद्रित करते हुए अनुकूल माहौल बनाने को प्राथमिकता देनी चाहिए। उनके अनुसार एनईपी का प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हर किसी की शिक्षा तक पहुंच हो। हमारे देश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, विशेष रूप से डिजिटल संसाधनों की कमी है।
हमारा मानना है कि हाइब्रिड लर्निंग सेंटर बनाने और डिजिटल बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए सरकार को मदद की घोषणा करनी चाहिए। शैक्षिक संस्थानों की सहायता के लिए बजट में फंड्स का प्रावधान किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘यह देखते हुए कि भारत दुनिया के सबसे युवा और सबसे बड़े देशों में से एक है हाइब्रिड लर्निंग यह सुनिश्चित करने का सबसे अच्छा तरीका है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देश के हर कोने तक पहुंचे।
धीवे के सह-संस्थापक और सीईओ प्रदीप केपी के अनुसार भारतीय आईटी पारिस्थितिकी तंत्र भविष्य की वेब 3 और ब्लॉकचेन अर्थव्यवस्था बनाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। दुनिया के लिए 'मेक इन इंडिया' के भारत सरकार के दृष्टिकोण और मिशन को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है। डिजिटल अर्थव्यवस्था और वेब 3 विभिन्न उपयोग के मामलों में गहरी पैठ बना रहे हैं और सार्वजनिक डिजिटल बुनियादी ढांचे के रूप में उपयोग के लिए ब्लॉकचेन का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में उम्मीद है कि सरकार ब्लॉकचेन तकनीक से जुड़ी कोई बड़ी घोषणा करे।
उनके अनुसार यह वह समय है कि सरकार सक्रिय रूप से राजकोषीय राहत और नीतियों को लाए जो इन प्रौद्योगिकियों के उपयोग को प्रोत्साहित करते हैं। सीबीडीसी और डिजिटल वॉलेट कंपनियों के लिए नियामकीय ढांचे पर जोर दिए जाने का काफी इंतजार किया जा रहा है।
ड्रिंकप्राइम के सह-संस्थापक और सीईओ विजेंदर रेड्डी मुथयाला के अनुसार हम जल-जीवन-मिशन और हर घर जल जैसी पहलों के माध्यम से पीने के पानी को अधिक सुलभ बनाने के लिए सरकार की सराहना करते हैं। हमारा मानना है कि सुरक्षित पेयजल को और अधिक किफायती बनाना महत्वपूर्ण है। इस मामले में उपभोक्ताओं को टिकाऊ राहत देने के लिए वित्तीय वर्ष 2023-24 के बजट सरकार को वाटर प्यूरिफायर पर जीएसटी को कम करने या समाप्त करने का विचार करना चाहिए।