पूर्व वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने इतना कम किया था टैक्स
भारत के प्रधान मंत्री रह चुके और 1992 में देश के पूर्व वित्त मंत्री मनमोहन सिंह द्वारा बजट पेश किया गया था। उन्होंने आयकर में 10 फीसदी की कटौती की थी, जिसके बाद यह 40 फीसदी पर आ गया था। साथ ही सरचार्ज 12 फीसदी किया था, जिसके बाद कुल आय 44.8 फीसदी हो गया था। वॉलंटरी कर अनुपालन के लिए और चेलिया कमेटी के सुझावों के बाद इसमें कटौती की गई थी।
इससे पहले 1991 में भी मनमोहन सिंह ने बजट पेश किया था, जिसे उदारीकरण बजट कहा जाता है। तब मनमोहन सिंह ने देश में विदेशी कंपनियों को कारोबार करने के लिए खुली छूट दे दी थी। उस वक्त से ही देश में उदारीकरण का दौर शुरू हुआ था। भारतीय कंपनियों को भी देश के बाहर व्यापार करना आसान हुआ था। कस्टम ड्यूटी को 220 फीसदी से घटाकर के 150 फीसदी पर लाया गया था। इस बजट के दो दशक बाद भारत की जीडीपी में रफ्तार देखने को मिली थी।
पी. चिदंबरम ने भी की थी आयकर में कटौती
साल 1997 में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने भारत में बजट पेश किया था। उन्होंने आयकर 40 फीसदी से घटाकर 30 फीसदी कर दिया था और सरचार्ज शून्य था। इस तरह तब कुल टैक्स 30 फीसदी था। इस बजट को सपनों का बजट भी कहा जाता है। तब वित्त मंत्री ने आयकर और कंपनी कर में कटौती करने की घोषणा की थी।
2019 में निर्मला सीतारमण ने 50 साल बाद बढ़ाया था टैक्स
साल 2019 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपना पहला बजट पेश किया था। 1971 के बाद पहली बार भारत में टैक्स बढ़ाया गया था। उन्होंने आयकर 30 फीसदी और सरचार्ज 37 फीसदी कर दिया था। सरचार्ज के अलग-अलग रेट थे। 37 फीसदी सबसे उच्चतम था और सेस चार फीसदी था। उन्होंने कहा था कि ज्यादा कमाई वाले लोगों को देश की प्रगति के लिए ज्यादा टैक्स चुकाना चाहिए, इसलिए इसमें बढ़ोतरी की जा रही है।
बजट 2020 में की नए आयकर स्लैब की घोषणा
बजट 2020 में आम करदाताओं की सुविधा के लिए वित्त मंत्री ने नए आयकर स्लैब की घोषणा की। हालांकि वित्त मंत्री ने नई टैक्स स्लैब की दरों को वैकल्पिक रखा। यानी अगर किसी करदाता को पुराने स्लैब से ज्यादा फायदा हो रहा है तो वो उसे दाखिल कर सकता है।
- 5 लाख तक की आय पर कोई कर नहीं।
- 5 लाख से 7.5 लाख तक की आय पर 10 फीसदी की दर से कर।
- 7.5 लाख से 10 लाख तक की आय पर 15 फीसदी की दर से कर।
- 10 लाख से 12.5 लाख तक की आय पर 20 फीसदी की दर से कर।
- 12.5 लाख से 15 लाख तक की आय पर 25 फीसदी की दर से कर।
- 15 लाख के ऊपर की आय पर 30 फीसदी की दर से कर।