वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को अपना दूसरा बजट पेश करेंगी। घरेलू मोर्चे पर वैसे ही सरकार दिक्कतों का सामना कर रही है। मांग में कमी, सुस्त अर्थव्यवस्था, निवेश में कमी और बैंकिंग सेक्टर में बढ़ते एनपीए से सरकार वैसे ही परेशान है। ऐसे में विश्व में भी फिलहाल तीन ऐसे मुद्दे हैं, जिनका वित्त मंत्री को बजट पेश करते वक्त ध्यान रखना होगा।
फिलहाल कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आ गई है, लेकिन कुछ दिनों पहले ही ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बाद कीमतों में उछाल देखने को मिला था। लेकिन अभी स्थिति पूरी तरह से सही नहीं हुई है। भारत ने ईरान से तेल लेना बंद कर दिया है। हालांकि पश्चिम एशिया में तनाव अगर बढ़ता है तो फिर कीमतों में एक बार फिर से उछाल देखने को मिल सकता है। इससे भारत में पेट्रोल-डीजल के अलावा रसोई गैस और केरोसीन की कीमतों में उछाल आ सकता है, इससे पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की संभावना है। अगर सरकार एक्साइज ड्यूटी में कमी करती है, तो फिर सरकार की कमाई पर भी असर पड़ेगा। कच्चे तेल की कीमतों में प्रत्येक 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ने से विकास दर में 0.2 से 0.3 फीसदी की कमी आएगी, वहीं थोक महंगाई दर में 1.7 फीसदी का इजाफा होगा।
फिलहाल अमेरिका और चीन के बीच पहले चरण की व्यापार समझौते पर सहमति बन गई है। इससे दोनों देशों के बीच पिछले 17 महीनों से चल रही ट्रेड वॉर (व्यापार युद्ध) फिलहाल थम जाएगा।समझौते की शर्तों के मुताबिक लगभग 11 लाख करोड़ (160 अरब डॉलर) के चीनी आयातों पर 15 दिसंबर तक लगा प्रस्तावित अमेरिकी टैरिफ (आयात शुल्क) टल जाएगा। जिन उत्पादों पर आयात शुल्क लगाया जाना था, उनमें इलेक्ट्रॉनिक्स और खिलौने भी शामिल थे।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप फिलहाल विश्व व्यापार संगठन के खिलाफ काफी मुखर हो गए हैं। ट्रंप चाहते हैं कि व्यापार संगठन चीन और भारत को विकासशील देशों की कैटेगिरी से हटाएं। ट्रंप का मानना है कि यह दोनों देश इस कैटेगिरी का बहुत ज्यादा गलत फायदा उठा सकते हैं। अगर विश्व व्यापार संगठन भारत को विकासशील देशों की कैटेगिरी से हटाता है तो फिर यह आने वाले दिनों में आयात-निर्यात पर काफी असर डाल सकता है।