एमएसएमई और एनबीएफसी सेक्टर को भी आम बजट से काफी उम्मीदें हैं। अर्थव्यवस्था को फिलहाल एक बूस्टर शॉट चाहिए, जिससे फिर से विकास की रफ्तार तेज हो सके। बजट से उम्मीदों पर अमर उजाला से बात करते हुए किनारा कैपिटल की संस्थापक और सीईओ हार्दिका शाह ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि इंडस्ट्री के हिसाब से अभी आउटलुक काफी सही नहीं है। जो स्थिति अभी है उसके फिलहाल उबरने में काफी वक्त लगेगा।
शाह ने कहा कि एनबीएफसी कंपनियों को बैंकों का साथ मिलना चाहिए। इसके लिए सरकार को कदम उठाने होंगे। इशका फायदा ये होगा कि छोटे उद्योगों को जल्दी से लोन मिल सकेगा। एमएसएमई को इस बार के बजट में सरंक्षण देने के बारे में घोषणाएं होनी चाहिए। इनके लिए ज्यादा प्लेटफॉर्म बने और कुछ सेक्टर्स के लिए सब्सिडी की घोषणा हो। वहीं डीएफआई के लिए टैक्स में रियायत मिलें।
एमएसएमई सेक्टर को सब्सिडी मिलनी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि इस तरह की कंपनियां सभी सेक्टर में मौजूद हैं। हमें वित्त मंत्री और सरकार से आशा है कि वो ऋण की उपलब्धता इस सेक्टर के लिए हमेशा सुनिश्चित करेगी। एमएसएमई सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी की तरह हैं। ऐसे में इनके लिए कुछ सौगातों की घोषणा होने की उम्मीद है।
फिनटेक कंपनी फिनवे के सीईओ रचित चावला ने बातचीत में कहा कि केंद्रीय बजट 2020-21 में वित्त मंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकता एमएसएमई को बेहतर लिक्विडिटी और सेक्टर-विशिष्ट प्रोत्साहन देना होनी चाहिए। यदि लिक्विडिटी फिर से बढ़ जाए और एमएसएमई की स्थिति में सुधार आए तो आने वाले वित्तीय वर्ष में 6.5 फीसदी जीडीपी वृद्धि एक असंभव कार्य नहीं है।
एनबीएफसी के स्वास्थ्य और एमएसएमई के स्वास्थ्य के बीच एक मजबूत संबंध है। एमएसएमई के वित्तीय लक्ष्य एनबीएफसी की वित्तीय स्थिरता पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं और उनकी सामूहिक वृद्धि आर्थिक विकास का एक सूचकांक है। आईएलएंडएफएस और डीएचएफएल संकट भारत के वित्तीय बाजारों पर भारी प्रभाव पड़ा है जो अभी भी बाजार में लिक्विडिटी की कमी का खामियाजा भुगत रही है।