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Union Bank: वधावन बंधुओं के खिलाफ 140 करोड़ के बैंक लोन धोखाधड़ी का नया मामला दर्ज, सीबीआई ने की कार्रवाई

Thu, 05 Jan 2023 07:32 PM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बैंक ने आरोप लगाया है कि गुरुआशीष कंस्ट्रक्शन हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एचडीआईएल) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी थी, जो मुंबई में रियल एस्टेट कारोबार कर रही थी। वधावन दंपति के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अक्टूबर 2020 में यस बैंक से 200 करोड़ रुपये की कथित ऋण धोखाधड़ी के संबंध में मामला दर्ज किया था
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सीबीआई की छापेमारी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सीबीआई ने एचडीआईएल के प्रमोटरों राकेश वधावन और सारंग वधावन के खिलाफ 140 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी के एक नए मामले में मामला दर्ज किया है। अधिकारियों ने बताया है कि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर 4,300 करोड़ रुपये के पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव (पीएमसी) बैंक घोटाला मामले में फंसे कारोबारियों के खिलाफ नई कार्रवाई शुरू की गई है।

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बैंक ने आरोप लगाया है कि गुरुआशीष कंस्ट्रक्शन हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एचडीआईएल) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी थी, जो मुंबई में रियल एस्टेट कारोबार कर रही थी।   वधावन दंपति के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अक्टूबर 2020 में यस बैंक से 200 करोड़ रुपये की कथित ऋण धोखाधड़ी के संबंध में मामला दर्ज किया था और वे कई एजेंसियों की जांच का सामना कर रहे हैं। पीएमसी बैंक में 4,300 करोड़ रुपये से अधिक की कथित ऋण धोखाधड़ी से संबंधित धन शोधन रोकथाम अधिनियम के एक अन्य मामले के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी उनकी जांच कर रहा है। 

अधिकारियों ने कहा कि फर्म ने मुंबई के गोरेगांव (पश्चिम) में पांच चरणों में 40 एकड़ भूमि के विकास के लिए महाराष्ट्र आवास और क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) के साथ कथित तौर पर 3,167 करोड़ रुपये का डेवेलपमेंट अनुबंध किया था। 
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उन्होंने बताया कि परियोजना का पहला चरण 1,022 करोड़ रुपये की लागत से दिसंबर 2017 तक पूरा होना था, जिसके लिए 2010 में 200 करोड़ रुपये का ऋण मंजूर किया गया था और अगले साल वितरित किया गया था। अधिकारियों ने कहा कि इस खाते को 2014 में गैर-निष्पादित संपत्ति घोषित किया गया था, क्योंकि मूलधन और ब्याज का भुगतान नहीं किया गया था। फॉरेंसिक ऑडिट में पाया गया कि 100 करोड़ रुपये मूल कंपनी एचडीआईएल को दिए गए, लेकिन हस्तांतरण को सही ठहराने वाले किसी भी चालान या सहायक दस्तावेज को रिकॉर्ड में नहीं रखा गया। साथ ही कंपनी ने अपने बही-खातों का खुलासा करने में सहयोग नहीं किया।   

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