सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में भारत की बेरोजगारी दर में मामूली वृद्धि दर्ज की गई है। 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए बेरोजगारी दर (UR) नवंबर के 4.7 प्रतिशत के मुकाबले बढ़कर 4.8 प्रतिशत पर पहुंच गई है।
दिसंबर 2025 के पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के बुलेटिन से पता चलता है कि ग्रामीण भारत में बेरोजगारी दर 3.9 प्रतिशत पर स्थिर बनी हुई है। इसके विपरीत, शहरी क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति में गिरावट देखी गई है, जहां बेरोजगारी दर पिछले महीने के 6.5 प्रतिशत से बढ़कर 6.7 प्रतिशत हो गई है।
बेरोजगारी दर में मामूली वृद्धि के बावजूद, देश के समग्र वर्कर पॉपुलेशन रेश्यो (WPR) में सुधार देखा गया है। WPR, जो कुल जनसंख्या में नियोजित व्यक्तियों के अनुपात को दर्शाता है, दिसंबर में बढ़कर 53.4 प्रतिशत हो गया, जो नवंबर में 53.2 प्रतिशत था।
दिसंबर 2025 में श्रम शक्ति भागीदारी दर (LFPR) में भी ऊपर की ओर रुझान देखा गया, जो अर्थव्यवस्था के प्रति श्रमिकों के बढ़ते भरोसे का संकेत हो सकता है। 15 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए कुल LFPR 56.1 प्रतिशत रहा, जबकि नवंबर में यह 55.8 प्रतिशत था।
ग्रामीण क्षेत्रों में LFPR 58.6 प्रतिशत से बढ़कर 59 प्रतिशत हो गया है। हालांकि, शहरी LFPR में हल्की गिरावट देखी गई और यह 50.4 प्रतिशत से घटकर 50.2 प्रतिशत रह गया। महिलाओं की भागीदारी के मोर्चे पर, ग्रामीण महिला LFPR में लगातार वृद्धि जारी है, जो दिसंबर में 40.1 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
यह रिपोर्ट जनवरी 2025 से अपनाई गई नई सैंपलिंग प्रणाली के तहत जारी नौवां मासिक बुलेटिन है। इसका मकसद उच्च-गुणवत्ता और व्यापक कवरेज वाले श्रम से जुड़े आंकड़े मुहैया कराना है। अखिल भारतीय स्तर ये आंकड़े कुल 3,73,990 व्यक्तियों के सर्वेक्षण के आधार पर तैयार किया गया है।
दिसंबर के आंकड़े भारतीय श्रम बाजार की एक जटिल तस्वीर पेश करते हैं। जहां एक ओर शहरी क्षेत्रों में बढ़ती बेरोजगारी दर नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय हो सकती है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिर रोजगार और बढ़ता कार्यबल अनुपात (WPR) अर्थव्यवस्था की आंतरिक मजबूती को दर्शाता है। आने वाले महीनों में शहरी रोजगार बढ़ाने और महिलाओं की कार्यबल में बढ़ती भागीदारी को बनाए रखना प्रमुख आर्थिक चुनौती होगी।