अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा, ब्राजील, भारत और ताइवान सहित 69 देशों और 27 सदस्य देशों वाले ईयू से होने वाले आयात पर टैरिफ की नई दरों वाले कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके साथ अमेरिकी अर्थव्यवस्था में संरक्षणवाद का नया दौर आरंभ हो गया है। कभी व्यापार में संरक्षणवाद का कट्टर विरोधी रहा अमेरिका, अब उसी राह पर चल पड़ा है। टैरिफ की इस नई लहर के कारण शुक्रवार को वैश्विक शेयर बाजारों में तगड़ी गिरावट दिखी।
ट्रंप की नई टैरिफ दरों में कनाडा से आयातित कई वस्तुओं पर 35%, ब्राजील पर 50%, भारत पर 25%, ताइवान पर 20% और स्विट्जरलैंड पर 39% शुल्क शामिल है। आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, राष्ट्रपति के आदेश में 69 देशों के लिए सात दिनों में 10% से 41% तक की उच्च आयात शुल्क लगाने की बात की गई है। वहीं, चीन को ट्रंप प्रशासन के साथ एक स्थायी टैरिफ समझौते पर पहुंचने के लिए 12 अगस्त की समय सीमा का सामना करना पड़ रहा है। एक अमेरिकी अधिकारी ने पत्रकारों बताया कि वे इस समझौते की दिशा में प्रगति कर रहे हैं।
अमेरिका में दाम बढ़ने लगे
ट्रंप के टैरिफ की घोषणा ऐसे समय में हुई है जब इससे अमेरिका में कीमतें बढ़ने लगी हैं। अमेरिकी वाणिज्य विभाग के ताजा आंकड़ों से यह पता चला है। टैरिफ से प्रभावित देशों ने कहा कि वे कम दर पाने की उम्मीद में अमेरिका से वार्ता की कोशिश करेंगे। अधिकांश देश टैरिफ से स्तब्ध हैं।
ऑस्ट्रेलिया पर सिर्फ 10 फीसदी दर
ऑस्ट्रेलिया के लिए न्यूनतम टैरिफ दर 10% बनाए रखने के बाद उसने अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी होने की बात कही।
400 अंक गिरा डाउ जॉन्स फ्यूचर्स
ट्रंप की ओर से नए टैरिफ लगाने के फैसले के बाद दुनियाभर के शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिली। डाउ जोन्स फ्यूचर्स शुक्रवार को 400 अंक गिर गया, वहीं नैस्डैक और एस एंड पी 500 फ्यूचर्स में भी करीब 1% की गिरावट देखी गई। कनाडा के मुख्य शेयर सूचकांक से जुड़े वायदा भाव में भी गिरावट आई। सोसाइटी जनरल के एशिया अनुसंधान प्रमुख और मुख्य अर्थशास्त्री वेई याओ ने 2 अप्रैल को ट्रंप की ओर से घोषित प्रारंभिक टैरिफ के बाद बाजार में आई गिरावट का जिक्र करते हुए कहा कि बाजार की प्रतिक्रिया अप्रैल की वैश्विक परिसंपत्ति में आई गिरावट जितनी अस्थिर नहीं थी।
कनाडा पर तत्काल लागू होगा बढ़ा हुआ टैरिफ, कार्नी फैसले से निराश
ट्रंप ने टैरिफ लागू करने के लिए आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया है और इसके लिए विदेशी नेताओं पर दबाव डाला। आदेश में कहा गया है कि कुछ व्यापारिक साझेदारों ने, बातचीत में शामिल होने के बावजूद, ऐसी शर्तें रखीं जो, मेरे विचार से, हमारे व्यापारिक संबंधों में असंतुलन को पर्याप्त रूप से दूर नहीं करतीं या आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में अमेरिका के साथ पर्याप्त रूप से संरेखित नहीं हैं। ट्रंप ने कनाडा के लिए एक अलग आदेश जारी किया है जिसमें फेंटेनाइल-संबंधी शुल्कों के अधीन कनाडाई वस्तुओं पर दर को पहले के 25% से बढ़ाकर 35% कर दिया है। वह बोले, कनाडा अवैध नशीले पदार्थों का प्रवाह रोक नहीं पाया है।
भारतीय बाजार तक पहुंच के लिए दबाव का हथकंडा अपना रहा अमेरिका : एसजेएम
स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने ट्रंप के टैरिफ की निंदा करते हुए कहा कि अमेरिका संवेदनशील क्षेत्रों में भारतीय बाजारों तक पहुंच बनाने के लिए भारत पर दबाव डालने का हथकंडा अपना रहा है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े संगठन ने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सरकार को अपने रुख पर अडिग रहने की सलाह भी दी। एसजेएम के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने कहा, टैरिफ से एक ओर व्यापारिक खतरे घरेलू मुद्रास्फीति बढ़ाकर अमेरिकी उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचाएंगे, तो दूसरी ओर भारत के लिए कोई भी अल्पकालिक नुकसान महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनने की अनिवार्यता को और मजबूत बनाएगा। उन्होंने कहा, अगर अमेरिका को लगता है कि इस दबाव की रणनीति भारत को प्रभावित कर सकती है, तो उसे यह जान लेना चाहिए कि आज का भारत एक दशक पहले वाला भारत नहीं है।