डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ के साइड इफेक्ट्स
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अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से व्यापार प्रतिबंधों के कारण भारत सहित अन्य एशियाई बाजारों में चीन अपने निर्यात को और आक्रामक कर सकता है। क्रिसिल ने अपनी एक रिपोर्ट में यह दावा किया है। क्रिसिल के अनुसार, क्षेत्रीय और वैश्विक दोनों बाजारों में भारतीय निर्यातकों के लिए प्रतिस्पर्धा कड़ी हो सकती है। इससे भारत के निर्यात को बढ़ाने की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है।
अमेरिका और चीन के बीच तनाव के कारण भू-राजनीतिक जोखिम का खतरा
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति की ओर से चीनी वस्तुओं पर प्रस्तावित भारी टैरिफ अमल में आने से चीन की अर्थव्यवस्था में मंदी आ सकती है। अगर ऐसा होता है तो इससे ड्रैगन भारत सहित अन्य एशियाई बाजारों में अपने निर्यात का रुख आक्रामक करेगा।" अमेरिका और चीन के बीच का व्यापारिक तनाव वैश्विक व्यापार के लिए भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का जोखिम पैदा करती रहती हैं। इस बीच, चालू वित्तीय वर्ष में भारत का व्यापार घाटा बढ़ गया है क्योंकि आयात लगातार निर्यात से आगे निकल रहा है।
चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत का निर्यात प्रदर्शन अस्थिर
रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत का निर्यात प्रदर्शन अस्थिर रहा है। पहली तिमाही में जहां व्यापारिक निर्यात में स्थिर वृद्धि देखी गई, वहीं दूसरी तिमाही में इसमें गिरावट आई। अक्तूबर 2024 में थोड़ी रिकवरी हुई, लेकिन नवंबर और दिसंबर में निर्यात में फिर गिरावट आई। दिसंबर 2024 में, भारत का व्यापारिक निर्यात 4.8 प्रतिशत की गिरावट के बाद साल-दर-साल आधार पर 1 प्रतिशत घटकर 38.01 अरब डॉलर रह गया। यह गिरावट रत्न और आभूषण निर्यात (-26.5 प्रतिशत) और तेल निर्यात (-28.6 प्रतिशत) में महत्वपूर्ण कमी के कारण आई। हालांकि, कोर क्षेत्र में निर्यात का आंकड़ा 8.3 प्रतिशत बढ़ने से गिरावट को पाटने में मदद मिली। हालांकि इसमें भी नवंबर के 11.8 प्रतिशत से कम की वृद्धि दिखी। कोर सेक्टर के प्रमुख क्षेत्रों रेडीमेड गारमेंट्स, अयस्क और खनिज, हस्तशिल्प और कॉफी के निर्यात में मजबूत वृद्धि दिखी।
भारत का बढ़ता हुआ व्यापार घाटा चिंता का कारण
क्रिसिल ने भारत के निर्यात से जुड़ा सकारात्मक पक्ष बताते हुए कहा कि भारत के सेवा व्यापार में अधिशेष और धन प्रेषण के मजबूत प्रवाह से थोड़ी राहत मिली है। उम्मीद है कि देश का चालू खाता सुरक्षित क्षेत्र में रहेगा। हालांकि, बढ़ता हुआ व्यापार घाटा चिंता का कारण बना हुआ है जिस पर कड़ी निगरानी की जरूरत है। क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले महीनों में व्यापार की गतिशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि चीन अपने निर्यात क्षेत्र को कौन सी नई दिशा देता है और भारत उसके परिणामस्वरूप आने वाली चुनौतियों से कैसे निपटता है।