आरबीआई ने 2025 में दरों में कटौती करने उम्मीद जताई है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप की नीतियों के बारे में अनिश्चितता और महंगाई संबंधी दबाव के कारण आरबीआई की ब्याज दरों में कटौती का समय प्रभावित हो सकता है।
अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां भारत के केंद्रीय बैंक आरबीआई के लिए चुनौती बन सकती हैं। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप की नीतियों से भारतीय रिजर्व बैंक की ब्याज दरों में कटौती की योजना प्रभावित हो सकती है। आरबीआई महंगाई दर में गिरावट आने के चलते रेपो दर में कटौती की योजना बना रही है।
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स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप की नीतियों के बारे में अनिश्चितता और महंगाई संबंधी दबाव के कारण आरबीआई की ब्याज दरों में कटौती का समय प्रभावित हो सकता है। ट्रंप की नीति आरबीआई की नीतिगत ढील के समय में बाधा उत्पन्न कर सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक जहां एक ओर घरेलू महंगाई में कमी आने की उम्मीद है, लेकिन खाद्य कीमतों में उतार-चढ़ाव और ट्रंप की नीतियों के चलते इसमें देरी हो सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि उच्च महंगाई से स्टॉक और बॉन्ड प्रदर्शन के बीच मजबूत संबंध हो सकता है। 2022 में भी महंगाई और ब्याज दरों में तेजी का स्टॉक और बॉन्ड पर प्रभाव पड़ा था। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि अचल संपत्तियां, नकदी और सोना महंगाई के खिलाफ प्रभावी बचाव के रूप में काम कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त उपभोक्ता स्टेपल और उच्च गुणवत्ता वाले स्टॉक महंगाई को लेकर स्थिरता प्रदान कर सकते हैं।
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आरबीआई ने 2025 में दरों में कटौती करने उम्मीद जताई है। लेकिन लगातार उच्च महंगाई और आर्थिक विकास में उछाल के कारण दरों में कटौती की गति पर रोक लग सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मौजूदा आर्थिक माहौल काफी जटिल है। इसके चलते वैश्विक और घरेलू कारक मौद्रिक नीति निर्णयों को प्रभावित कर सकते हैं। निवेशकों और नीति निर्माताओं को अर्थव्यवस्था में विकास और स्थिरता को संतुलित करने के लिए इन चुनौतियों का सावधानीपूर्वक सामना करना होगा।
यह है योजना
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, नवंबर में खुदरा मुद्रास्फीति 5.48 प्रतिशत थी, जबकि अक्तूबर में यह 6.21 प्रतिशत थी, जो भारतीय रिजर्व बैंक के 2-6 प्रतिशत के आराम बैंड के अनुरूप है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि मुद्रास्फीति में गिरावट आगे भी जारी रहती है तो फरवरी में आगामी एमपीसी में दर में कटौती की संभावना अधिक है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि समानांतर रूप से, फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) के हॉकिश रुख से प्रेरित यूएस डॉलर इंडेक्स (डीएक्सवाई) के मजबूत होने के कारण भारतीय रुपया (आईएनआर) मूल्यह्रास दबाव में रहा है।