क्या आप जानते हैं कि सफेद चाय और हरी चाय एक ही पौधे से आती हैं? फर्क सिर्फ इसकी प्रोसेसिंग में होती है। सुबह-सुबह पहले तोड़ी गई कोमल पत्तियां बेहतरीन मानी जाती हैं और इनकी कीमत ₹10,000 प्रति किलो तक होती है। लेकिन जरा-सी चूक के बाद वही पत्तियां साधारण चाय बन जाती हैं। इसकी कीमत कुछ सौ रुपये किलो से ज्यादा नहीं होती। कंप्यूटर प्रोसेसर की दुनिया भी कुछ ऐसी ही है। एक ही सेमीकंडक्टर वेफर्स से इंटेल के i3, i5, i7 और i9 जैसे प्रोसेसर निकलते हैं। लेकिन हर चिप अपने तय मानक पूरे नहीं कर पाता। नतीजतन, बेहतरीन क्वालिटी वाले कम और निचले स्तर के प्रोसेसर ज़्यादा बनते हैं। यही वजह है कि हाई-एंड i9 जैसे चिप्स की उपलब्धता बेहद सीमित रहती है।
कभी चिप निर्माण का मानक माना जाने वाला इंटेल समय के साथ पिछड़ता चला गया। TSMC जैसे ताइवानी प्रतिद्वंद्वी बेहतरीन उत्पादन देने लगे, जबकि इंटेल के उन्नत मैन्युफैक्चरिंग नोड्स बार-बार विफल रहे। इंटेल ने अपने संसाधनों की बहुत ज्यादा बर्बादी की। बहुत सारा समय गंवाया। 2015 तक इंटेल की फाउंड्री के मामले में लीडरशिप खत्म हो गई और 2021 में कंपनी को अपने GPU उत्पादन भी TSMC को आउटसोर्स करने पड़े। नतीजा कंपनी के प्रतिद्वंद्वी एएमडी ने प्रदर्शन और वैल्यू-फॉर-मनी दोनों मामलों में बढ़त हासिल कर ली, दूसरी ओर इंटेल बार-बार अपने सबसे महत्वाकांक्षी डिजाइनों में देरी करता रहा। नतीजा चिप निर्माण के मामले में अमेरिका की आत्मनिर्भरता कम होती चली गई और टेक मार्केट में अमेरिका का दबदबा कम होने का रिस्क बढ़ने लगा। इसी सोच के साथ इंटेल को फिर से खड़ा करने की रणनीति बननी शुरू हुई। फिलहाल हालात बदलते नजर आ रहे हैं।
अमेरिका की ट्रंप सरकार ने हाल ही में इंटेल में 10% गैर-वोटिंग हिस्सेदारी खरीदने की घोषणा की। इसकी कीमत करीब 8.9 अरब डॉलर है। यह दिखाता है कि वॉशिंगटन अब भी इंटेल को चीन और ताइवान से निपटने के लिए रणनीतिक संपत्ति मानता है। इतना ही नहीं, एनवीडिया ने भी इंटेल में लगभग 4% हिस्सेदारी (करीब 5 अरब डॉलर मूल्य) खरीदने का एलान किया है। और यह कोई सामान्य निवेश नहीं है- यह साझेदारी उत्पादन और तकनीकी सहयोग, दोनों पर केंद्रित है। अब बड़ा सवाल है कि जीपीयू बाजार का निर्विवाद लीडर एनवीडिया, इंटेल जैसे संघर्षरत खिलाड़ी पर क्यों दांव क्यों लगा रहा है। इसका जवाब आत्मनिर्भरता और ट्रंप के मागा (मेक अमेरिका ग्रेड अगेन) से जुड़ा है। एनवीडिया के ज्यादातर हाई-एंड चिप्स ताइवान की कंपनी टीएसएमसी पर निर्भर हैं। भू-राजनीतिक तनाव की स्थिति में यह जोखिम भरा हो सकता है। इंटेल के साथ साझेदारी एनवीडिया को अपना बैकअप प्लान मानकर चल रही है।