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ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल से तीन दिन में देश को हुआ 10 हजार करोड़ का नुकसान

Mon, 23 Jul 2018 03:54 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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ट्रांसपोर्टरों की अनिश्चितकालीन देश व्यापी हड़ताल से औद्योगिक व्यवस्था पटरी से उतरने लगी है। अनिश्चितकालीन हड़ताल से तीन दिन में ट्रांसपोर्टरों को तकरीबन 10 हजार करोड़ रुपये की चपत लगी है।

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वहीं, उद्योगों को करोड़ों रुपये के नुकसान का आंकलन लगाया जा रहा है। कच्चा माल नहीं आने और तैयार माल की आपूर्ति नहीं होने से उद्यमियों से लेकर कारोबारियों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन का दावा है कि जिले से बाहर जाने वाले तकरीबन छह हजार ट्रकों का चक्का पूरी तरह से जाम है।

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में पड़ा असर
हड़ताल अगर जारी रही तो अगले एक-दो दिन में औद्योगिक शहर नोएडा-ग्रेटर नोएडा के उद्यमी तिलमिला उठेंगे। दरअसल, यहां ज्यादातर उद्योगों की सप्लाई दूसरे राज्यों में होती है। दोनों शहरों में स्थापित तकरीबन 10 हजार कोरेगोटेड, टेक्सटाइल, मेटल व प्लास्टिक मोल्डिंग, इलेक्ट्रिकल गुड्स और ऑटोमोटिव इकाइयां पुराने स्टॉक की बदौलत चल रही थीं जो अब खत्म होने को है।
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मल्टीनेशनल कंपनियों पर सर्वाधिक असर
ऐसे में स्टॉक खत्म होते ही उद्योगों की रफ्तार भी थम जाएगी। कच्चे माल के ट्रक रास्ते में फंसे हुए हैं जबकि तैयार माल गोदामों में पड़े है। ट्रकों की हड़ताल का सबसे ज्यादा असर मल्टीनेशनल कंपनियों पर पड़ रहा है जो जीरो इंवेंटरी (स्टॉक) पर काम करती हैं, यानी जिस दिन स्टॉक की जरूरत होती है उससे एक दिन पहले ऑर्डर किया जाता है।

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6 हजार ट्रकों के पहिए थमे 

नोएडा-ग्रेटर नोएडा के 900 से ज्यादा ट्रांसपोर्टरों के करीब 10 हजार वाहन खाने पीने की वस्तुओं के अलावा औद्योगिक इकाइयों का सामान इधर से उधर पहुंचाने का काम करते हैं। नोएडा से दिल्ली के अलावा बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तरांचल और हिमाचल, कोलकाता के बीच सबसे ज्यादा आवाजाही होती है। हालांकि, जिले के अंदर ट्रांसपोर्टरों की सेवाएं जारी हैं लेकिन कोई भी गाड़ी जिले से बाहर नहीं भेजी जा रही है। करीब 6 हजार ट्रकों के पहिए थम गए हैं।

इन मांगों को लेकर हड़ताल
डीजल की कीमत कम होनी चाहिए, कीमतों में त्रैमासिक संशोधन हो। देशभर में टोल टैक्स से ट्रांसपोर्टरों पर भारी बोझ, टोल बैरियर मुक्त भारत बने। थर्ड पार्टी इंश्योरेंस निर्धारण में पारदर्शिता और जीएसटी के दायरे से बाहर हो। ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पर लगने वाला टीडीएस खत्म हो, ई वे बिल की समस्याएं खत्म हों। डायरेक्ट पोर्ट डिलीवरी योजना समाप्त हो, पोर्ट कंजेशन भी खत्म होना चाहिए।

नोएडा एंटरप्रिनियोर्स एसोसिएशन के महासचिव वी के सेठ ने बताया कि ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल का पहले दो दिन तो उद्योगों पर असर नहीं थी, लेकिन तीसरे दिन से असर दिखने लगा है। स्टॉक खत्म होते ही इकाइयों में काम ठप हो जाएगा। इससे होने वाले नुकसान का आंकलन मुश्किल है।

अजय मल्होत्रा, अध्यक्ष, उद्योग मंच ने कहा कि जिन ट्रकों में तैयार माल भेजा गया था वो रास्ते में ही फंसे हैं। देहरादून सिडकुल से पहले तोड़फोड़ की भी सूचना मिली है। लखनऊ, आगरा में भी ट्रक रोके जाने से भारी नुकसान का आंकलन है।

नोएडा ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा ने बताया कि लोकल रूट पर गाड़ियां चल रही हैं लेकिन जिले से बाहर और लंबे रूटों पर इन्हें नहीं भेजा जा रहा है। जो बुकिंग थीं उन्हें रद्द कर दिया गया है। जिले में करीब 6 हजार ट्रकों का चक्का पूरी तरह जाम है।
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