इस सिस्टम के शुरू हो जाने के बाद ट्रेनों की लेटलतीफी पर काफी लगाम लगेगी। पूरे रूट पर ऑटोमेटिक सिग्नल प्रणाली लग जाने से और गाड़ियों की रियल टाइम जानकारी से कर्मचारियों को खुद से डाटा फीड नहीं करना पड़ेगा, जिससे काफी समय बचेगा।
अभी हर 10 मिनट में चलती है एक रेलगाड़ी
फिलहाल रेलवे का जो सिस्टम है, उसके अनुसार हर 10 मिनट में एक ट्रेन चलती है। इससे एक ट्रेन की दूसरी ट्रेन से दूरी कम से कम 10 किलोमीटर की होती है या फिर एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन जितनी। शताब्दी, राजधानी और दूरंतों जैसी प्रीमियम गाड़ियों के लिए 3 स्टेशन तक ट्रैक को खाली रखा जाता है।
इस दौरान अन्य मेल-एक्सप्रेस, पैसेंजर और मालगाड़ी को लूप लाइन पर खड़ा करके निकाला जाता है। जब यह ट्रेन अगले स्टेशन पर पहुंच जाती है, फिर अन्य गाड़ियों को निकाला जाता है।