पहले चीनी एप और उसके बाद वहां की कंपनियों एवं निवेश पर शिकंजा कसने के बाद अब 5जी तकनीक के परीक्षणों के लिए चीनी विक्रेताओं को प्रतिबंधित़ करने की खबरें आ रही हैं। हालांकि अंतिम तौर पर अभी यह निर्णय नहीं हुआ है, लेकिन केंद्र सरकार के सूत्र बताते हैं कि चीन की कंपनी हुवावे और जेडटीई को 5जी परीक्षणों में शामिल नहीं किया जाएगा।
टेलीकॉम ऑपरेटरों को अप्रत्यक्ष तौर पर यह कहा गया है कि वे किसी भी स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए चीन की टेलीकॉम कंपनियों जैसे हुवावे और जेडटीई के साथ नेटवर्क खरीद अनुबंध के लिए आगे न आएं। बता दें कि दूरसंचार विभाग बहुत जल्द ही 5जी परीक्षणों के लिए दूरसंचार ऑपरेटरों के आवेदन को फाइनल मंजूरी देने जा रहा है।
इसमें कहा जा रहा है कि दूरसंचार विभाग केवल गैर-चीनी विक्रेताओं के साथ अनुबंध को मंजूरी देगा। इससे यह बात साफ हो जाती है कि भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया, जिन्होंने नोकिया, एरिक्सन, हुवावे और जेडटीई के साथ ट्रायल करने के लिए आवेदन जमा किया था, अब उन्हें नोकिया और एरिक्सन के साथ ही ट्रायल करना होगा।
रिलायंस जियो को एरिक्सन, नोकिया और सैमसंग के साथ आगे बढ़ने की अनुमति दी जा सकती है। यदि जियो कंपनी कोई ऐसा आवेदन प्रस्तुत करती है कि वह स्वतंत्र रूप से 5जी का परीक्षण करेगी तो उसे अनुमति दिए जाने की संभावना बरकरार रहेगी।
इस मामले में यह कहा जा रहा था कि 5जी का परीक्षण ट्रायल निजी दूरसंचार ऑपरेटरों द्वारा किया जाएगा, ऐसे में उन पर सीमा प्रतिबंध का वह नियम लागू नहीं होता है, जो हाल ही में भारत सरकार ने लागू किया है।
दूरसंचार विभाग के मुताबिक, चूंकि स्पेक्ट्रम एक सार्वजनिक संपत्ति है और कंपनियों द्वारा इसे दिया जाएगा, इसलिए यहां पर सरकारी दिशा निर्देश लागू किए जा सकते हैं। हालांकि नया नेटवर्क बनाने में, चीनी विक्रेताओं की लागत आमतौर पर अन्य कंपनियों के मुकाबले करीब बीस फीसदी कम रहती है।
दूसरी ओर अब एक नया मामला सामने आ गया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कहा कि चीनी कंपनियों की सहायक कंपनियों और उनसे जुड़े लोगों ने शेल कंपनियों से भारत में फर्जी व्यवसाय (रिटेल शोरूम) करने के लिए करीब 100 करोड़ रुपये का एडवांस लिया है।