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Tariffs Row: ट्रेड यूनियन और किसान अमेरिकी टैरिफ व भारत-ब्रिटेन सीईटीए का करेंगे विरोध, प्रदर्शन 13 अगस्त को

Mon, 04 Aug 2025 03:49 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Tariffs Row: देश के 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा के मंच, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों-एसकेएम ने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकियों और भारत-ब्रिटेन सीईटीए के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।इन संगठनों ने 13 अगस्त को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala
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विस्तार
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देश के 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा के मंच, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों-एसकेएम ने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकियों और भारत-ब्रिटेन सीईटीए के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।इन संगठनों ने 13 अगस्त को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। एक संयुक्त बयान के अनुसार, सीटीयू-एसकेएम ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने और रूस के साथ तेल व्यापार समझौते के लिए दंडात्मक कर लगाने की ट्रम्प की हालिया धमकियों की कड़ी निंदा की।

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बयान में कहा गया है कि सीटीयू-एसकेएम सभी किसानों, श्रमिकों, छात्रों और देशभक्त नागरिकों से 13 अगस्त, 2025 को प्रतिरोध के राष्ट्रव्यापी दिवस में शामिल होने का आह्वान करता है, जिसमें ट्रैक्टर और मोटरसाइकिल रैलियां, विरोध प्रदर्शन, सार्वजनिक सभाएं और विभिन्न प्लेटफार्मों और साझेदार संगठनों द्वारा तय किए गए विरोध के अन्य रूपों जैसे विभिन्न सामूहिक कार्यवाहियां शामिल होंगी।

ट्रेड यूनियन और किसान संगठनों ने मांग की है कि भारत को ट्रंप की टैरिफ धमकियों को अस्वीकार करना चाहिए और रूस सहित सभी देशों के साथ व्यापार करने के अपने संप्रभु अधिकार पर जोर देना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि भारत-यूके सीईटीए की तुरंत समीक्षा की जानी चाहिए और उसमें बदलाव किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कॉरपोरेट शोषण को रोकने के लिए अमेरिका-भारत व्यापार समझौते के लिए सभी वार्ताएं रोक दी जानी चाहिए।
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संगठनों ने कहा है कि अब कोई गुप्त व्यापार समझौता नहीं किया जाएगा- भविष्य में होने वाले सभी सौदों की पूर्ण संसदीय जांच और सार्वजनिक परामर्श से गुजरना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ईस्ट इंडिया कंपनी ने व्यापार के माध्यम से भारत को उपनिवेश बनाया- आज, सीईटीए और अमेरिकी व्यापार समझौते कॉरपोरेट साम्राज्यवाद के नए साधन हैं।

श्रमिक और किसान संगठनों ने एलान किया कि वे 13 अगस्त को किसान, श्रमिक संप्रभुता और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए उठ खड़े होंगे, जिससे एक स्पष्ट संदेश जाएगा। बयान में आगे कहा गया है कि अमेरिका की ओर से टैरिफ का एलान आर्थिक दबाव बनाने का स्पष्ट तरीका है। इसका उद्देश्य रूस के साथ भारत के व्यापारिक संबंधों पर सवाल खड़े कर भारत पर हुक्म चलाना है।

संगठनों ने अपने बयान में कहा कि ऐसे आक्रामक कदम अमेरिकी व्यापार नीतियों के पाखंड को उजागर करते हैं। अमेरिका अपनी कंपनियों के लिए खुले बाजारों की मांग करता है और संप्रभु राष्ट्रों को धमकाने के लिए टैरिफ को हथियार के रूप में इस्तेमाल करता है। बयान में सरकार को घेरते हुए कहा गया है कि भारत सरकार का इन खतरों के प्रति विनम्र समर्पण भी उतनी ही चिंताजनक है। यह पश्चिमी साम्राज्यवादी हितों के प्रति सरकार की अधीनता को दर्शाता है। बयान में आगे कहा गया है कि इस तरह के समझौतों के अमल में आने से भारत के औद्योगीकरण में कमी आएगी और बेरोजगारी में भी भारी वृद्धि होगी। श्रमिक और किसान संगठनों ने आरोप लगाया है कि भारत-यूके सीईटीए देश की खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा और आर्थिक आत्मनिर्भरता पर भी सीधा हमला है।

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