सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो ने देश में निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक एचडीएफसी बैंक के वर्क कल्चर पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। लिंक्डइन पर सौमी चक्रवर्ती नामक एक यूजर की ओर से साझा किए गए वीडियो ने एचडीएफसी बैंक में कर्मचारियों के साथ किए जाने वाले व्यवहार पर प्रकाश डाला है। कई अन्य यूजर्स की ओर से साझा किए जाने के बाद तेजी से यह वीडियो वायरल हुआ है। इस वीडियो में बैंक के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पुष्पल रॉय के नेतृत्व में कर्मचारियों के अनुभवों का प्रत्यक्ष विवरण दिखाया गया है।
एचडीएफसी बैंक का एक मैनेजर वीडियो में कर्मचारियों से कर रहा है बदतमीजी
बंगाली भाषा में बने इस वीडियो में रॉय को अपने अधीनस्थों को उनके काम की स्थिति और लक्ष्यों के बारे में चर्चा के दौरान उनसे बदतमीजी करते देखा जा सकता है। उनका कठोर लहजा और कर्मचारियों को "शटअप" कहना विशेष रूप से अपमानजनक है। वीडियो में रॉय को जॉन नाम के एक कर्मचारी से कहते हुए दिखाया गया है, "आपके लिए, मेरा सीपीआई स्कोर 77 है। आज, मैं आपको और टिथिर को एक एचआर मेमो जारी करूंगा।"
बैंक ने तत्काल कर्रवाई करते हुए बदतमीज अधिकारी को किया निलंबित
हालांकि सोशल मीडिया पर वीडियो के वायरल होने के बाद, एचडीएफसी बैंक ने तत्काल कार्रवाई की और कोलकाता में उक्त बदतमीज अधिकारी को निलंबित कर दिया है। बैंक ने एक बयान जारी कर कहा कि बैंक के आचरण दिशानिर्देशों के अनुसार इस मामले की विस्तृत जांच की जाएगी। एचडीएफसी बैंक ने कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार के कदाचार के लिए शून्य सहनशीलता की नीति के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। हमने सभी कर्मचारियों के साथ गरिमा और सम्मान के साथ व्यवहार करने में अपने विश्वास पर जोर दिया है।
सोशल मीडिया यूजर्स बोले- देश में कठोर श्रम कानूनों की जरूरत
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने कहा है कि देश में सख्त श्रम कानूनों की जरूरत है। कई लोगों ने अपनी निराशा व्यक्त की कि इस तरह के विषाक्त व्यवहार आजकल विभिन्न संगठनों में प्रचलित हो गए हैं। एक लिंक्डइन यूजर ने लिखा, "यह सभी वित्तीय संस्थानों की तस्वीर है।" कई लोगों ने मांग की है कि ऐसे नकारात्मक व्यवहार में लिप्त व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, सभी कर्मचारियों आत्मसम्मान पर जोर दिया जाए। एक अन्य उपयोगकर्ता ने कहा कि भारत को तत्काल कड़े श्रम कानूनों की आवश्यकता है, क्योंकि नेतृत्व अक्सर कर्मचारियों की भलाई और सकारात्मक कार्य संस्कृति की बजाय संख्या, लाभ और शेयर मूल्य वृद्धि को प्राथमिकता देता है।