क्रिसमस और नववर्ष पर नोटबंदी के कारण इस बार सैलानियों की संख्या कम रहने के आसार हैं। वाराणसी में नोटबंदी के कारण 30 से 40 फीसदी सैलानियों ने अपनी यात्रा रद्द कर दी है। आगरा के लिए सैलानियों की बुकिंग में गिरावट है वहीं जम्मू-कश्मीर में पर्यटन पर दोहरी मार पड़ी है। उम्मीद केवल हिमाचल और उत्तराखंड से है जहां पर्यटन अब धीरे-धीरे गति पकड़ने लगा है। पिछले साल के आंकड़ों से तुलना करें तो नवंबर में ताज का दीदार करने आने वाले सैलानियों की संख्या में 25 फीसदी की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
क्रिसमस और नए वर्ष पर भी नोटबंदी का असर पड़ सकता है। ट्रैवल एजेंसियों के मुताबिक ताज आने वाले सैलानियों की संख्या में इस बार 30 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है। बुकिंग में गिरावट का रुख देखते हुए होटल मालिक अपनी रणनीति बदलने को विवश हुए हैं। बड़े कलाकारों की जगह अब केवल डीजे, ड्रिंक्स, डांस और डिनर के जरिये ही नए साल को सेलिब्रेट करने की तैयारी है। काशी आने वाले सैलानियों ने भी नोटबंदी के कारण बड़ी संख्या में अपनी यात्राएं स्थगित की हैं।
20 फीसदी सैलानी जो बाबा विश्वनाथ की नगरी आने वाले थे उन्होंने ट्रैवेल एजेंसियों से अपने टूर पैकेज सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड और दुबई के लिए परिवर्तित करा लिए हैं। जम्मू-कश्मीर में टूरिस्ट सीजन हिंसा और नोटबंदी की दोहरी मार से जूझ रहा है। दिसंबर के शुरू होते ही जहां जम्मू संभाग से लेकर कश्मीर घाटी के पर्यटक स्थलों के लिए बड़ी संख्या में एडवांस बुकिंग हो जाती थी, वहीं इस बार हालात उलट हैं। ट्रैवल एजेंसियों के पास नए साल की बुकिंग का टोटा है।
जम्मू-कश्मीर स्लीपर बस ऑनर एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि कुमार शर्मा के मुताबिक पिछले साल की तुलना में इस बार 70 फीसदी कारोबार प्रभावित है। श्रीनगर के लिए कोई बुकिंग नहीं मिल रही है। नए साल पर केवल श्री माता वैष्णो देवी के श्रद्धालुओं पर उम्मीद टिकी है। विदेशी सैलानियों ने तो अब तक रियासत का रुख भी नहीं किया है।