तिरुपति लड्डू में कथित मिलावट को लेकर आंध्र प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने स्पष्ट किया कि सीबीआई ने YSRCP को किसी भी तरह की ‘क्लीन चिट’ नहीं दी है। उन्होंने कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट साफ बताती है कि लड्डू में इस्तेमाल सामग्री ‘घी’ नहीं थी, बल्कि वनस्पति आधारित पदार्थ था।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि SIT रिपोर्ट के अनुसार घी में पामोलीन तेल और रसायनों की मिलावट पाई गई। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि 2022 में CFTRI लैब की रिपोर्ट में भी घी में मिलावट की पुष्टि हुई थी, लेकिन तत्कालीन सरकार ने उस रिपोर्ट को ‘जानबूझकर दबा दिया’।
उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने दोहराया कि जांच एजेंसियों की रिपोर्ट को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है, जबकि दस्तावेजी तथ्य मिलावट की ओर इशारा करते हैं। उन्होंने मांग की कि जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई हो और भक्तों की आस्था से जुड़े मामलों में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए।
नायडू ने इस मिलावट को भगवान के खिलाफ सबसे बड़ा पाप बताते एक सदस्यीय समिति गठित करने की घोषणा की। यह कदम विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट सामने आने के बाद उठाया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एनडीडीबी ने साफ तौर पर बताया कि घी में पशु वसा की मिलावट है। मैंने वही बात कही थी। आज SIT ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। SIT रिपोर्ट में घी में पामोलीन तेल और रसायनों की मिलावट की पुष्टि हुई है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार के कार्यकाल में यह कथित पाप हुआ और उस दौरान कई मंदिरों पर हमले भी किए गए।