वायु प्रदूषण पर सबसे ज्यादा चिंता
सबसे बड़ी चिंता वायु प्रदूषण को लेकर है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के लिए रखा गया ₹1,091 करोड़ का प्रावधान ऐसे समय में कम माना जा रहा है, जब कई शहरों में वायु गुणवत्ता अक्सर गंभीर श्रेणी में पहुंच जाती है। राज्यों के लिए स्वच्छ वायु कार्ययोजनाओं को लागू करना पहले ही मुश्किल है; ऐसे में केंद्र से कम संसाधन मिलने का मतलब कमजोर निगरानी और धीमी कार्रवाई हो सकता है।
इस कटौती पर जलवायु कार्यकर्ताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रदूषण नियंत्रण में कटौती एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल की अनदेखी है, जिससे संकट और गहराएगा।
सरकार ने क्या पक्ष रखा?
सरकार का कहना है कि प्रदूषण उसके लिए प्राथमिकता बना हुआ है। आर्थिक कार्य विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार वायु और जल प्रदूषण से निपटने के लिए कई माध्यमों से फंडिंग कर रही है।
उनके मुताबिक, सीवेज और ड्रेनेज से जुड़े कार्यों पर भी बड़ा खर्च हो रहा है और वित्त आयोग के अनुदानों का बड़ा हिस्सा स्वच्छता और जल संबंधी परिणामों से जुड़ा हुआ है।
विपक्ष की क्या है मांग?
विपक्ष इस तर्क से संतुष्ट नहीं है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने वायु प्रदूषण पर संसद में विस्तृत बहस की मांग की है और बजट में आवंटन बढ़ाने पर जोर दिया है। एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि प्रदूषण को राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर, पर्याप्त धन के साथ गंभीर योजना बनाने की जरूरत है।