सिलिकॉन वैली के उद्यमी और सामुदायिक नेता अजय जैन भुटोरिया ने कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हजारों तकनीकी कर्मचारियों को छंटनी का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से एच-1बी वीजा पर जो लोग हैं उन्हें अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान हालात में उन्हें नई नौकरी ढूंढनी होगी और देश छोड़ने के जोखिम के 60 दिनों के भीतर अपना वीजा स्थानांतरित करना होगा।’
एफआईआईडीएस खांडे राव कांड अनुसार कई परिवारों पर इसका विपरीत प्रभावित पड़ सकता है। परिवारों को संपत्तियों की बिक्री करनी पड़ सकती है और बच्चों की शिक्षा में व्यवधान आ सकते हैं। तकनीकी कंपनियों के लिए एच-1बी वीजा धारक कर्मचारियों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उनकी बर्खास्तगी की तारीख कुछ महीने बढ़ा दी जाए तो यह फायदेमंद होगा।
ग्लोबल इंडियन टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स एसोसिएशन (जीआईटीपीआरओ) और फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (एफआईआईडीएस) ने रविवार को नौकरी चाहने वालों को नौकरी रेफर करने वालों और मुखबिरों से जोड़कर इन आईटी पेशेवरों की मदद करने के लिए एक समुदायव्यापी प्रयास शुरू किया है। एफआईआईडीएस अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवाओं (यूएससीआईएस) के नीति निर्माताओं और निर्णय निर्माताओं को प्रभावित करने के प्रयासों पर काम करेगा।
खांडे राव कांड ने कहा “तकनीकी उद्योग में बड़े पैमाने पर छंटनी के साथ जनवरी 2023 आईटी पेशेवरों के लिए बहुत कठिन रहा। इस महीने में कई प्रतिभाशाली लोगों ने अपनी नौकरी खो दी। कंपनियाें में छंटनी के फैसले से भारतीय प्रवासी सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। नौकरी से निकाले गए एच-1बी धारकों को 60 दिन में एच-1बी प्रायोजक की नौकरी ढूंढनी होगी या वीजा कैंसिल होने के बाद 10 दिन के भीतर नौकरी छोड़नी होगी।
संकट के समय में इस भयानक स्थिति का समाधान खोजने और भारतीय आईटी पेशेवरों की मदद के लिए विभिन्न व्हाट्सएप समूह बनाए हैं। एक व्हाट्सएप ग्रुप में 800 से अधिक बेरोजगार भारतीय आईटी कर्मचारी हैं जो देश में अपने बीच रिक्तियों को प्रसारित कर रहे हैं। एक अन्य समूह में वे कुछ आव्रजन वकीलों के साथ विभिन्न वीजा विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं। जिन्होंने इस समय के दौरान अपनी परामर्श सेवाओं की पेशकश करने के लिए स्वेच्छा से काम किया है।
राकेश (बदला हुआ नाम) को गुरुवार को माइक्रोसॉफ्ट से निकाल दिया गया था। वह एच-1बी वीजा पर अमेरिका में हैं। उन्होंने कहा, ‘इन परिस्थितियों का हम प्रवासियों पर बहुत विनाशकारी प्रभाव पड़ता है और ये परेशान करने वाले हैं।
भारतीय आईटी पेशेवरों की परेशानियों को और बढ़ाते हुए गूगल का ताजा निर्णय है कि वे अपने ग्रीन कार्ड प्रोसेसिंग को रोक रहे हैं। माना जा रहा है कि ऐसे समय में जब कंपनी ने हजारों कर्मचारियों को निकाल दिया है वह यूएससीआईएस के सामने यह दलील नहीं रख सकती कि उन्हें स्थायी निवासी के रूप में एक विदेशी आईटी पेशेवर की आवश्यकता है। अन्य कंपनियां भी ऐसा ही करेंगी इसकी आशंका है।