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Reaction: 'यह व्यापार नहीं, दबाव बनाने की राजनीति'; 25 % यूएस टैरिफ पर भारतीय उद्योग जगत की तीखी प्रतिक्रिया

Fri, 01 Aug 2025 05:31 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला नेटवर्क, मुंबई/नई दिल्ली

सार

अतिरिक्त टैरिफ का विरोध कर रहा उद्योग जगत चाहता है कि भारत सरकार प्रतिरोधात्मक टैरिफ के साथ-साथ नए बाजारों की खोज, एफटीए वार्ताएं तेज करने और घरेलू उत्पादन प्रोत्साहन को त्वरित प्राथमिकता दे।
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टैरिफ पर ट्रंप के फैसले की चौतरफा चर्चा - फोटो : एएनआई / अमर उजाला / एजेंसी
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विस्तार
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भारत से आयातित वस्तुओं पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाकर भारतीय निजी उद्योग जगत में तीव्र असंतोष और चिंता पैदा कर दी है। कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई), फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) और एसोचैम जैसी शीर्ष उद्योग संस्थाओं ने निर्णय को अनुचित व एकतरफा बताते हुए भारत सरकार से अमेरिकी प्रशासन के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराने की मांग की है।

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सीआईआई अध्यक्ष संजीव बजाज ने कहा कि इससे भारतीय कंपनियों को न सिर्फ प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान पहुंचेगा, बल्कि द्विपक्षीय निवेश संबंध भी प्रभावित होंगे। ट्रंप का फैसला न तो व्यापार संतुलन की दिशा में है और न ही द्विपक्षीय साझेदारी के हित में। सीआईआई के मुताबिक 2024 में भारत ने अमेरिका को करीब 78 अरब डॉलर मूल्य का माल निर्यात किया था, जिसमें फार्मास्युटिकल्स, इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटो पार्ट्स और सॉफ्टवेयर सेवाएं प्रमुख थीं। नए टैरिफ इन क्षेत्रों को सीधा प्रभावित करेंगे।

उद्यमियों को वैश्विक मंच से धकेलने की कोशिश
फिक्की के महासचिव शैलेश पाठक ने ट्रंप प्रशासन के फैसले को अनुचित व पक्षपातपूर्ण व्यवहार करार दिया। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों के उद्यमियों को किनारे लगाने का यह तरीका 21वीं सदी की वैश्विक व्यापार भावना के खिलाफ है। फिक्की ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि यह रुख जारी रहा, तो भारतीय निवेशक अमेरिका में टेक, फार्मा और ऑटोमोबाइल सेक्टर में नए निवेश से हिचकिचाएंगे।
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यूरोप और खाड़ी देशों में अवसर खोजें
एसोचैम ने सुझाव दिया है कि भारत को अपने एक्सपोर्ट बास्केट को री-डायवर्सिफाई करना चाहिए। महासचिव दीपक सूद ने कहा कि अमेरिकी नीति अब स्थिर नहीं रही। भारत को यूरोपीय संघ, खाड़ी क्षेत्र और अफ्रीका के साथ अपने व्यापारिक रिश्ते मजबूत करने होंगे।

आईटी और फार्मा क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित
देश की प्रमुख आईटी इंडस्ट्री संस्था नासकॉम और इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस ने कहा कि उच्च टैरिफ भारतीय सेवाओं और जेनेरिक दवाओं की प्रतिस्पर्धात्मकता को सीधे नुकसान पहुंचाएगा। सीईओ देवी चंद्रन ने कहा, भारतीय आईटी कंपनियां पहले से ही अमेरिकी वीजा और नियामकीय जटिलताओं से जूझ रही हैं। अब इस टैरिफ से लागत और बढ़ेगी, जिससे अमेरिका में भारतीय सेवाओं की मांग पर असर पड़ेगा। फार्मा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी सन फार्मा के प्रवक्ता ने कहा कि ट्रंप के फैसले से अमेरिकी मरीजों को सस्ती जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति खतरे में पड़ सकती है।

मझोले और छोटे उद्योगों पर दोहरी मार
फरीदाबाद, राजकोट, कोयंबटूर और पुणे जैसे औद्योगिक केंद्रों में निर्यात पर आधारित मझोले और लघु उद्यमों ने भी गहरी चिंता जताई है। इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (ईईपीसी इंडिया) के अध्यक्ष अरुण कुमार गुप्ता का कहना है कि अमेरिका को भेजे जाने वाले ऑटो कलपुर्जों और इंडस्ट्रियल मशीनरी की लागत प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएगी। इससे एमएसएमई क्षेत्र पर व्यापक असर पड़ेगा।

उद्योग जगत एकमत
अमेरिका के खिलाफ संतुलित पर ठोस प्रतिक्रिया दे भारत

भारतीय निजी क्षेत्र यह मानता है कि अमेरिका के टैरिफ निर्णय से सिर्फ आर्थिक ही नहीं, बल्कि रणनीतिक दबाव भी बनाया जा रहा है। हालांकि उद्योग जगत यह भी चाहता है कि भारत सरकार प्रतिरोधात्मक टैरिफ के साथ-साथ नए बाजारों की खोज, एफटीए वार्ताएं तेज करने और घरेलू उत्पादन प्रोत्साहन (पीएलआई योजना) को त्वरित प्राथमिकता दे। स्पष्ट है कि भारत के उद्योग अब व्यापारिक लचीलेपन और वैश्विक विकल्पों की दिशा में निर्णायक कदम उठाने को तैयार हैं।

भारत नहीं देगा तात्कालिक प्रतिक्रिया दीर्घकालिक रणनीति पर चलेगा
यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल (यूएसआईबीसी) और नेशनल फॉरेन ट्रेड काउंसिल (एनएफटीसी) से जुड़े व्यापारिक नेताओं का मानना है कि भारत इस चुनौती का सामना रणनीतिक लचीलापन और नीति-आधारित सुधारों के जरिये करेगा। यूएसआईबीसी अध्यक्ष अर्जुन मेहता ने कहा कि भारत ने वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में खुद को विश्वसनीय साझेदार के रूप में स्थापित किया है। भारतीय नेतृत्व तात्कालिक प्रतिक्रिया के बजाय दीर्घकालिक रणनीति पर ध्यान देगा। ट्रंप के फैसले के बाद भारत संभवतः अपनी घरेलू विनिर्माण क्षमता, एफटीए वार्ताओं और वैकल्पिक निर्यात बाजारों को मजबूूती से आगे बढ़ाएगा।

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