मौसम का पूर्वानुमान बताने वाली संस्था स्काईमेट ने इस बार कमजोर मानसून रहने की भविष्यवाणी की है। स्काईमेट ने कहा है कि जून से सितंबर तक चार माह की बारिश सामान्य से सात फीसदी तक कम रह सकती है। गर्मी भी ज्यादा पड़ेगी। इसका मतलब यह है कि इस बार अलनीनो का खतरा रहने के आसार हैं। मानसून अगर कमजोर रहता है तो फिर देश में सूखा पड़ेगा, जिसके चलते खेती में पैदावार कम होगी और इससे खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है।
स्काईमेट के मुताबिक देश के 15 फीसदी हिस्से में सूखा पड़ने की संभावना है। अब सवाल उठता है कि यह 15 फीसदी हिस्सा कहां का हो सकता है। स्काईमेट के मुताबिक यह हिस्सा देश का उत्तर और पूर्वी भाग हो सकता है।
अगर देश में 96 से लेकर के 104 फीसदी बारिश होती है तो फिर उसे सामान्य मानसून माना जाता है। वहीं 90 से 96 फीसदी के बीच हुई बारिश सामान्य से नीचे माना जाता है। 90 फीसदी से कम बारिश को कमजोर मानसून माना जाता है।
पिछले पांच साल में तीन साल देश में सूखा पड़ा है। 2014, 2015 और 2018 में बारिश 90 फीसदी से कम हुई थी। 2018 में हालांकि सूखा ज्यादा नहीं पड़ा था, क्योंकि सितंबर के बाद भी कई जगह बारिश होती रही।