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OALP-X: सरकार ने तेल-गैस ब्लॉक नीलामी की समयसीमा दूसरी बार बढ़ाई, अब 31 दिसंबर 2025 तक लगा सकते हैं बोली

Tue, 28 Oct 2025 04:22 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सरकार ने ओएएलपी-एक्स लाइसेंसिंग राउंड के लिए बोली जमा करने की समयसीमा को दो महीने बढ़ाकर 31 दिसंबर 2025 कर दिया गया है। फरवरी में इंडिया एनर्जी वीक 2025 के दौरान शुरू किए गए इस राउंड की मूल अंतिम तिथि जुलाई के अंत तक थी, जिसे बाद में 31 अक्तूबर तक बढ़ाया गया था।
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crude oil - फोटो : Adobestock
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विस्तार
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सरकार ने नवीनतम तेल और गैस ब्लॉक नीलामी (OALP-X) के तहत बोलियां जमा करने की अंतिम तिथि दूसरी बार बढ़ा दी है। इससे संभावित निवेशकों को भागीदारी के लिए अधिक समय मिल जाएगा। यह जानकारी महानिदेशालय हाइड्रोकार्बन (डीजीएच) ने दी।

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ओएएलपी-एक्स लाइसेंसिंग राउंड के लिए बोली जमा करने की समयसीमा को दो महीने बढ़ाकर 31 दिसंबर 2025 कर दिया गया है। फरवरी में इंडिया एनर्जी वीक 2025 के दौरान शुरू किए गए इस राउंड की मूल अंतिम तिथि जुलाई के अंत तक थी, जिसे बाद में 31 अक्तूबर तक बढ़ाया गया था।

इसी के साथ डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड्स (डीएसएफ) के चौथे दौर और विशेष कोल-बेड मीथेन (सीबीएम) राउंड की बोलियां जमा करने की समयसीमा भी 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ाई गई है। इसके साथ ही डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड्स (DSF) के चौथे दौर और विशेष कोल-बेड मीथेन (CBM) राउंड की समयसीमा भी इसी तारीख तक बढ़ा दी गई है।

OALP-X के तहत कुल 25 ब्लॉक्स बोली के लिए पेश किए गए हैं, जिनका संयुक्त क्षेत्रफल करीब 1,91,986 वर्ग किलोमीटर है। इसमें छह ऑनशोर, छह शैलो-वॉटर, एक डीप-वॉटर और 12 अल्ट्रा-डीपवॉटर ब्लॉक्स शामिल हैं। ये ब्लॉक्स 13 तलछटी बेसिनों में फैले हुए हैं।

इस राउंड में अंडमान बेसिन में 47,058 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले चार ब्लॉक्स भी शामिल हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी इन ब्लॉक्स को भारत के लिए नए खोज क्षेत्र के रूप में देखते हैं और दावा करते रहे हैं कि यहां गयाना जैसे अंतरराष्ट्रीय हॉटस्पॉट्स से भी अधिक तेल और गैस भंडार मिलने की संभावना है।

सरकार के अनुसार, यह अब तक का सबसे बड़ा अन्वेषण क्षेत्र है, जिसका उद्देश्य कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस उत्पादन को बढ़ावा देना है। कच्चा तेल परिशोधन कर पेट्रोल-डीजल जैसे ईंधन में बदला जाता है, जबकि प्राकृतिक गैस बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण, CNG और घरेलू रसोई जैसे क्षेत्रों में उपयोग होती है।

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