औद्योगिक नीति एवं प्रोत्साहन विभाग के शीर्ष अधिकारी रहे अजय शंकर ने कहा कि सरकार को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और शहरी अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए अलग-अलग स्पष्ट रणनीति बनानी चाहिए। किसानों को सीधे तौर पर आर्थिक मजबूती देने के लिए उन्हें सौर ऊर्जा उत्पादन से जोड़ना चाहिए। निश्चित दरों पर बिजली खरीद की पुख्ता व्यवस्था कर यहां निवेश आकर्षित किया जा सकता है।
अभी गांवों तक बिजली पहुंचाने के लिए बिजली कंपनियों को 7 से 8.50 रुपये प्रति यूनिट तक की लागत आती है। लेकिन अगर यही बिजली कंपनियों को गांव के स्तर पर ही सस्ती दर पर मिल सके, तो इसे बिजली वितरण की अतिरिक्त लागत घटेगी, कंपनियों का लाभ बढ़ेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर को 24 घंटे अबाध बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी जो आज के समय एक स्वप्न मात्र है। अबाध बिजली आपूर्ति ग्रामीण क्षेत्रों में अन्य तरह की उत्पादकता को बढ़ाने में भी सहायक होगी।
टेरी में पेश सस्टेनेबल डेवेलपमेंट पर रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले छह वर्षों में भारत की स्थापित अक्षय ऊर्जा 2.5 गुना तक बढ़ गई है। लेकिन देश के कुल बिजली उत्पादन में इसका हिस्सा अभी भी बेहद कम (लगभग 12 फीसदी) है। अगर सही उपाय अपनाया जाता है तो यह क्षेत्र देश को बिजली आपूर्ति में बड़ी मदद कर सकता है।
चीन को जाने वाला ये फायदा देश को मिले
आज की स्थिति में सोलर पैनल के लिए भारत लगभग 100 फीसदी चीन पर निर्भर करता है। लेकिन अगर सरकार कंपनियों को यह पुख्ता भरोसा दे सके कि वह सौ फीसदी सोलर पैनलों की खरीद करने को तैयार है तो यह बड़े बदलाव वाला कदम साबित होगा। इसके लिए कंपनियों को तकनीकी और आर्थिक मदद की जानी चाहिए। इससे न सिर्फ सौर ऊर्जा के मामले में भारत को बड़ी आत्मनिर्भरता हासिल होगी, बल्कि सोलर एनर्जी के दूरगामी भविष्य की दृष्टि से यह भारी संख्या में रोजगार पैदा करने वाला क्षेत्र भी साबित होगा।
सस्टेनेबल डेवेलपमेंट विशेषज्ञ पूर्व सचिव अजय शंकर ने कहा कि पराली को किसानों की आर्थिक ताकत बनाया जाना चाहिए। एनटीपीसी इस समय ईंधन के रूप में 10 फीसदी पराली का इस्तेमाल करता है। इसे बढ़ाकर 20 फीसदी तक किया जा सकता है। राज्यों की संस्थाओं में भी इसी तरह उपयोग बढ़ाकर किसानों की समस्या को ही उनके लिए वरदान बनाया जा सकता है। इसी प्रकार उपलब्ध गोबर से गैस बनाकर उससे बिजली उत्पादन को बढ़ावा देना भी उनकी आय को बढ़ावा देने वाला साबित हो सकता है।
शहरी अर्थव्यवस्था में इस तरह मजबूती ला सकती है सरकार
द नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल के चेयरमैन रह चुके पूर्व आईएएस अधिकारी अजय शंकर ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में रोजगार को बढ़ाने का एक बड़ा माध्यम ऑटो सेक्टर में मजबूती लाना हो सकता है। केंद्र और राज्य सरकारों को आवश्यकता के अनुरूप ई-बसों, सीएनजी आधारित बसों की खरीद को बढ़ावा देना चाहिए। इससे एक बार में भी ऑटो सेक्टर में बड़ी मांग पैदा होगी, जो इस सेक्टर को मंदी से उबारने के साथ-साथ लोगों को प्रदूषण रहित विकास उपलब्ध कराएगी।
इसी प्रकार अब बीएस-4 जैसे पुराने वाहनों को सड़कों से हटाने के लिए एक नीति लानी चाहिए। एक निश्चित अवधि से ज्यादा पुराने वाहनों को हटाने के लिए नियम बनाना चाहिए और लोगों को बीएस6 मानक के वाहन खरीदने के लिए टैक्स छूट देनी चाहिए। इससे भी ऑटो सेक्टर को मजबूती मिलेगी।
ई-वाहनों की खरीद में अभी भी सबसे बड़ी बाधा इनके चार्जिंग स्टेशन की पर्याप्त सुविधा न होना है। इसे दूर करने के लिए बिजली कंपनियों को अपने ट्रांसफार्मर के जरिए जगह-जगह पर चार्जिंग स्टेशन लगाने चाहिए। इन वाहनों की बिक्री ऑटो सेक्टर को मजबूत बनाने के साथ-साथ पर्यावरण की दृष्टि से भी बेहद उपयोगी होगी।
इस प्रकार के वाहनों की खरीद बढ़ने से बैंकिंग सिस्टम और अन्य सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पैसा जाने से मांग बढ़ेगी जो धीरे-धीरे अन्य क्षेत्रों को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित करेगी।