ब्रोकरेज फर्म यूबीएस ने क्विक कॉमर्स सेक्टर को लेकर अपने ताजा आकलन में बड़ा संशोधन किया है। बुधवार को जारी रिपोर्ट में यूबएस ने जोमैटो और ब्लिंकिट की पैरेंट कंपनी इटरनल के क्विक कॉमर्स से जुड़े ईबीआईटीडीए मार्जिन अनुमानों में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 15-20 फीसदी की कटौती की है। वहीं स्विगी के क्विक कॉमर्स मार्जिन को भी 100-120 आधार अंकों को घटाया गया है।
यह संशोधन ऐसे समय आया है, जब एक दिन पहले सरकार ने प्रमुख डिलीवरी एग्रीगेटर्स से अनिवार्य 10 मिनट डिलीवरी डेडलाइन हटाने को कहा था। यूबीएस का कहना है कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा और प्लेटफॉर्म्स पर अधिक छूट के चलते क्विक कॉमर्स सेगमेंट में मार्जिन रिकवरी अब कुछ तिमाहियों तक टल सकती है।
हालांकि, यूबीएस ने यह भी स्पष्ट किया कि स्विगी के ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (जीओवी) और नेट ऑर्डर वैल्यू (एनओवी) के अनुमान मोटे तौर पर जस के तस रखे गए हैं, जबकि इटरनल के जीओवी और एनओवी अनुमानों में हल्की बढ़ोतरी की गई है। इसके अलावा, फूड डिलीवरी बिजनेस के लिए वित्त वर्ष 2028 में जीओवी, एनओवी और एडजस्टेड EBITDA के अनुमान भी लगभग अपरिवर्तित रखे गए हैं।
कमजोर ईबीआईटीडीए आउटलुक को देखते हुए यूबीएस ने दोनों कंपनियों के शेयरों के लिए अपने टारगेट प्राइस भी घटा दिए हैं। अब इटरनल के लिए नया टारगेट प्राइस ₹375 और स्विगी के लिए ₹510 तय किया गया है।
मार्जिन आउटलुक पर यूबीएस ने कहा कि भारतीय क्विक कॉमर्स बाजार में प्रतिस्पर्धा सितंबर 2025 से तेज हुई है और जनवरी 2026 तक बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, डिस्काउंट, चैनल चेक और सेंसर टॉवर के ऐप यूजेज डेटा के विश्लेषण से संकेत मिलता है कि यह तीव्र प्रतिस्पर्धा सेक्टर में मार्जिन सुधार को और देर से ला सकती है।