इंडिया फिनटेक फाउंडेशन (आईएफएफ) ने यूपीआई लेनदेन में बढ़ते संकेन्द्रण जोखिम को लेकर गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है ताकि डिजिटल भुगतान प्रणाली में प्रतिस्पर्धा और संतुलन बना रहे।
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यूपीआई के 80 प्रतिशत से ज्यादा लेनदेन में केवल दो कंपनियों का अधिकार
आईएफएफ का कहना है कि यूपीआई के 80% से ज्यादा लेनदेन सिर्फ दो कंपनियों के जरिए होते हैं। इससे सिस्टम पर कुछ कंपनियों का नियंत्रण है और बाकी छोटे खिलाड़ियों को जगह नहीं मिल पा रही।
डिजिटल वित्तीय पारदर्शिता के लिए खतरा
अप्रैल 2025 में स्टार्टअप महाकुंभ के दौरान लॉन्च किए गए आईएफएफ ने हाल ही में सरकार और आरबीआई को एक नीति सुझाव नोट दिया है, जिसमें कहा गया है कि यह स्थिति प्रतिस्पर्धा और डिजिटल वित्तीय पारदर्शिता के लिए खतरा बन सकती है।
सरकार एप की हिस्सेदारी भी घट रही
आईएफएफ ने बताया कि बड़ी कंपनियां भारी कैशबैक और डिस्काउंट देकर छोटे और स्थानीय ऐप्स को बाजार से बाहर कर रही हैं। यहां तक कि सरकारी एप भीम की हिस्सेदारी भी लगातार घट रही है।
सीमा को लेकर आईएफएफ का सुझाव
आईएफएफ का कहना है कि मौजूदा नीति में छोटे खिलाड़ियों को प्रोत्साहन का फायदा नहीं मिल पाता, जबकि बड़े ऐप्स को ज्यादा सब्सिडी मिल जाती है। इसलिए आईएफएफ ने सुझाव दिया है कि किसी भी कंपनी को कुल प्रोत्साहन का 10% से ज्यादा हिस्सा न मिले, ताकि छोटे ऐप्स को भी बढ़ने का मौका मिल सके।
संगठन ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि यूपीआई सिस्टम में डेटा पोर्टेबिलिटी यानी उपयोगकर्ता को अपने डेटा को आसानी से एक एप से दूसरे एप में ले जाने की सुविधा दी जाए। अगर अब कदम नहीं उठाए गए, तो यूपीआई जैसी सार्वजनिक डिजिटल व्यवस्था में एकाधिकार, असमानता और जोखिम बढ़ सकते हैं।