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उम्र को मात देने का दांव: जेफ बेजोस से लेकर सैम ऑल्टमैन तक, क्यों लंबी उम्र पर अरबों खर्च रहे दुनिया के अमीर?

Fri, 21 Aug 2026 03:52 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

क्या तकनीक की मदद से मौत को टाला जा सकता है? जेफ बेजोस, सैम ऑल्टमैन और दीपिंदर गोयल जैसे अरबपतियों के एंटी-एजिंग दांव की पूरी कहानी और इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों को जानने के लिए पढ़ें हमारी रिपोर्ट।
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अमरत्व का बाजार - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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मानव इतिहास में मृत्यु एक ऐसा अटल सत्य रहा है जिससे किसी भी राजा, महाराजा या प्राचीन काल के समृद्ध व्यक्ति ने कभी समझौता नहीं किया। लेकिन आज, सिलिकॉन वैली के अरबपतियों, वैज्ञानिकों और निवेशकों का एक नया गठबंधन तकनीक के दम पर इस अकाट्य सत्य को चुनौती दे रहा है। जेफ बेजोस, सैम ऑल्टमैन, पीटर थिएल और भारत के दीपिंदर गोयल जैसे दिग्गज उद्यमी मानव जीवन को अप्रत्याशित रूप से लंबा करने और बुढ़ापे को पलटने (रिवर्स एजिंग) की तकनीकों पर पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार, वैश्विक स्तर पर दीर्घायु बनाने का यह बाजार साल 2025 के 27 अरब डॉलर से बढ़कर 2035 तक 67 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।

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सैम आल्टमैन और एलन मस्क - फोटो : एएनआई/पीटीआई

सैम ऑल्टमैन और जेफ बेजोस ने किस तकनीक पर खेला है सबसे बड़ा दांव?

ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने निजी तौर पर 'रेट्रो बायोसाइंसेज' नामक बायोटेक कंपनी में 8 करोड़ डॉलर (180 मिलियन डॉलर) का भारी-भरकम निवेश किया है। इस कंपनी का सीधा उद्देश्य इंसानी जीवनकाल में 10 स्वस्थ वर्ष जोड़ना है। इसके अतिरिक्त, ऑल्टमैन स्वयं बुढ़ापा रोधी उपाय के रूप में 'मेटफॉर्मिन' (मधुमेह की दवा) भी लेते हैं, हालांकि स्वस्थ लोगों में इसकी उपयोगिता अभी अनिश्चित है। वहीं, अमेज़ॅन के संस्थापक जेफ बेजोस 'ऑल्टोस लैब्स' के मुख्य निवेशकों में शामिल हैं। यह कंपनी सेलुलर कायाकल्प पर काम कर रही है, जिसका उद्देश्य कोशिकाओं की कार्यक्षमता को बहाल करना और उम्र से जुड़ी शारीरिक गिरावट व बीमारियों को रोकना है।

क्या पीटर थिएल और एलन मस्क मृत्यु को केवल एक तकनीकी 'समस्या' मानते हैं?

पेपैल के पूर्व सह-संस्थापक पीटर थिएल इस रेस के सबसे मुखर चेहरों में से एक हैं। थिएल ने जीवनकाल बढ़ाने वाले शोधों में भारी निवेश किया है, भविष्य में तकनीक द्वारा पुनर्जीवित होने की उम्मीद में 'क्रायोनिक प्रिजर्वेशन'के लिए पंजीकरण कराया है और युवा रक्त प्लाज्मा के इस्तेमाल की बात की है। इसी तरह, प्रसिद्ध उद्यमी एलन मस्कने भी कहा है कि 'अर्ध-अमरता'को हासिल करना एक सुलझने योग्य समस्या है। मस्क का तर्क है कि जैविक प्रोग्रामिंग को बदलकर मानव जीवन को बढ़ाया जा सकता है। इस बीच, ब्रायन जॉनसन अपने शरीर को फिर से युवा बनाने के लिए 'ब्लूप्रिंट' कार्यक्रम के तहत हर साल लगभग 20 लाख (2 मिलियन) डॉलर खर्च कर रहे हैं, जिसमें उन्होंने अपने बेटे से प्लाज्मा लेने का प्रयोग भी किया था, जिसे बाद में रोक दिया गया।
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जोमैटो के सीईओ ने साझा किया अपना अनुभव - फोटो : ANI

भारत के दीपिंदर गोयल इस 'बायोहैकिंग' की होड़ में कैसे शामिल हुए हैं?

दीर्घायु को बढ़ाने की यह तकनीक अब वैश्विक स्तर से आगे बढ़कर भारतीय उद्योगपतियों के बीच भी जगह बना रही है। 'इटर्नल'- जिसे पहले जोमैटो के नाम से जाना जाता थाके अरबपति संस्थापक दीपिंदर गोयल 'टेंपल' नामक एक वेयरेबल डिवाइस लॉन्च करने जा रहे हैं। माथे के किनारे पहने जाने वाले इस छोटे डिवाइस की कीमत 1,000 डॉलर (लगभग 90,000 रुपये) होगी, जो शरीर के चयापचय  और 'एंट्रॉपी' बायोमार्कर को रियल-टाइम में ट्रैक करेगा। हालांकि इस डिवाइस को अभी तक स्वतंत्र वैज्ञानिक मान्यता या चिकित्सा विनियामक मंजूरी नहीं मिली है, लेकिन इसके प्री-ऑर्डर शुरू हो चुके हैं और इसकी शिपिंग साल के अंत तक होने की उम्मीद है।

अमरता के इस महंगे बिजनेस में क्या सामाजिक असमानता का खतरा है?

जैसे-जैसे यह क्षेत्र आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इससे जुड़े नैतिक और सामाजिक सवाल भी गंभीर हो रहे हैं। भविष्यवादी पीटर डियामैंडिस ने बुढ़ापे में संज्ञानात्मक, प्रतिरक्षा और शारीरिक कार्यक्षमता बहाल करने वाली दवाओं की खोज के लिए 10.1 करोड़ डॉलर (101 मिलियन डॉलर) की पुरस्कार राशि वाली 'एक्सप्राइज हेल्थस्पैन' प्रतियोगिता शुरू की है। इसके बावजूद, यह स्पष्ट है कि ये महंगी जीवन-रक्षक थेरेपी, पर्सनल मेडिकल टेस्टिंग और अत्याधुनिक क्लीनिक शुरुआती दौर में केवल चुनिंदा अमीरों की पहुंच में होंगे। इससे यह आशंका बलवती होती है कि अमीर लोग तकनीक के बल पर अधिक समय खरीद सकेंगे, जो अंततः समाज में जीवन और मृत्यु के स्तर पर एक गहरी असमानता पैदा करेगा।

अमरता और लंबी उम्र की यह जंग विज्ञान से अधिक आर्थिक ताकत और वर्चस्व का विषय बनती जा रही है। हालांकि तकनीकी दिग्गज जीवन की कोडिंग को बदलने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अंतिम सत्य यही है कि अभी तक मृत्यु अजेय बनी हुई है और अरबों डॉलर के इन दांवों का वास्तविक परिणाम आना अभी बाकी है।
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