भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते को लेकर उद्योग जगत और नीति-निर्माताओं में उत्साह है। उद्योग लीडर्स का कहना है कि यह समझौता न सिर्फ भारत की विकास आकांक्षाओं को गति देगा, बल्कि देश को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन हब बनाने के लक्ष्य को भी मजबूती देगा।
महिंद्रा ग्रुप के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर अनिश शाह ने इस समझौते का स्वागत करते हुए इसे द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत विकास पथ पर है और यह डील विकास को अतिरिक्त गति देगी।
शाह के मुताबिक, भारतीय निर्यात पर अमेरिकी रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करना और आगे चलकर टैरिफ व गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने की प्रतिबद्धता, निवेश के लिए जरूरी स्थिरता और भरोसा बढ़ाएगी।
दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक रिश्ते होंगे मजबूत
आदित्य बिरला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिरला ने भी कहा कि टैरिफ में कमी से दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक रिश्ते और मजबूत होंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिका में सबसे बड़े भारतीय निवेशक के तौर पर उनका समूह इस समझौते को सप्लाई चेन को मजबूत करने, मैन्युफैक्चरिंग के नए अवसर खोलने और दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने वाला मानता है। बिरला ने साफ किया कि समूह अमेरिका में अपने निवेश और मौजूदगी को और विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है।
विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप
टीवीएस मोटर कंपनी के चेयरमैन सुदर्शन वेणु ने कहा कि यह कदम भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों में भरोसा बढ़ाएगा। उन्होंने इसे विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप बताया। महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि शोर थमने के बाद दो स्वाभाविक साझेदार एक-दूसरे के करीब आते हैं, जो इस समझौते की अहमियत को दर्शाता है।
बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक उपलब्धि
आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने भी इसे बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक उपलब्धि करार दिया। स्पाइसजेट के चेयरमैन और एमडी अजय सिंह ने कहा कि यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के साथ हालिया समझौतों के बाद यह समझौता वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख को दर्शाती है और दीर्घकालिक विकास व मजबूत अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की नींव रखती है। उन्होंने इसे 'मेड इन इंडिया' ब्रांड के लिए बड़ा प्रोत्साहन बताया।
निवेश के नए अवसर खुलेंगे
आर्थिक कार्य विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के अंतिम रूप लेने से अनिश्चितता दूर हुई है और निवेश के नए अवसर खुलेंगे। हालांकि, अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोलने को लेकर उन्होंने कहा कि इस पर अभी कोई स्पष्टता नहीं है और समय के साथ स्थिति साफ होगी।
विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में लौटने की उम्मीद
इस बीच, समझौते के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की भारतीय शेयर बाजारों में वापसी की उम्मीद भी बढ़ी है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के एमडी और सीईओ आशीष चौहान ने कहा कि 2025 में एफपीआई के सतर्क रुख की बड़ी वजह ट्रेड को लेकर अनिश्चितता थी। उनका कहना है कि यह समझौता साफ संदेश देता है कि भारत और अमेरिका एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा लौट सकता है और बाजारों में सकारात्मक माहौल बनेगा।