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जीवन बीमा मतलब शुद्ध सुरक्षा: टर्म इंश्योरेंस की मांग बढ़ी, GST छूट से प्लान हुए सस्ते; बीमा बाजार में बदलाव

Mon, 24 Nov 2025 04:56 AM IST
शिवम गर्ग अमर उजाला ब्यूरो

सार

बीमा बदल रहा है। अगर आप इस बदलाव से अनभिज्ञ हैं, ताे इसमें आपका नुकसान है। जीवन बीमा का मतलब अब टैक्स बचत और निवेश तक सीमित नहीं रहा। लोग अब प्योर प्रोटेक्शन (टर्म इंश्योरेंस) के लिए इसे खरीद रहे हैं। इस बदलाव के पीछे महामारी की नसीहत और नया टैक्स सिस्टम प्रमुख वजहें हैं।
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जीवन बीमा - फोटो : एजेंसी
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विस्तार
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कोविड-19 महामारी ने लोगों को सिखाया है कि किसी अनहोनी में परिवार की सुरक्षा के लिए पर्याप्त बीमा कवरेज जरूरी है। नई कर व्यवस्था (जिसमें धारा 80सी जैसी छूट खत्म हो गई) ने टैक्स छूट के आधार पर जीवन बीमा खरीदने को गैर-जरूरी और कम लाभप्रद बना दिया। हाल ही में, जीएसटी से मिली पूरी छूट ने भी जीवन बीमा पाॅिलसी की लागत कम कर दी है। टैक्स शून्य होने से, टर्म इंश्योरेंस अधिक किफायती बन गया है, जाे बिना किसी मैच्योरिटी मूल्य के श्ाुद्ध सुरक्षा या मृत्यु लाभ देता है।
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पॉलिसीबाजार के मुताबिक, 22 सितंबर के बाद से टर्म इंश्योरेंस की मांग 2.5 गुना बढ़ गई। टर्म इंश्योरेंस की तेज मांग के कारण अक्तूबर 2025 में सभी बीमा कंपनियों का न्यू बिजनेस प्रीमियम सालाना आधार पर 12.1 फीसदी बढ़कर 34,007 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। अक्तूबर महीने में एचडीएफसी लाइफ के प्रोटेक्शन प्लान की मांग 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ी है। एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस ने अपने प्रोटेक्शन बिजनेस में सालाना आधार पर 34 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है।

एंडॉमेंट या यूलिप पॉलिसी से टर्म इंश्योरेंस कैसे बेहतर है?
सामान्य एंडॉमेंट पॉलिसी या यूलिप न तो पर्याप्त सुरक्षा देते हैं, न संतोषजनक रिटर्न। एंडॉमेंट पॉलिसी या यूलिप औसतन 6-7 फीसदी वार्षिक रिटर्न देती है, कई बार इससे भी कम। इस रिटर्न के साथ अच्छे रिटर्न ताे दूर, बढ़ती महंगाई के साथ अपनी खरीद क्षमता बनाए रखना भी मुश्किल होगा।

इन उत्पादों का बीमा कवरेज भी बेहद सीमित
उदाहरण के लिए, अगर कोई सालाना 25,000 रुपये एंडॉमेंट पॉलिसी में जमा करता है, तो उसे पांच से 10 लाख रुपये का कवर मिलता है। अगर यही 25,000 रुपये टर्म इंश्योरेंस में लगाएं, तो आसानी से एक करोड़ रुपये या इससे ज्यादा का कवर मिल सकता है।

इन बातों का रखें ध्यान
  • क्लेम सेटलमेंट रेश्यो : 97% से ऊपर का CSR अच्छा होता है।
  • सॉल्वेंसी रेश्यो : 180% या उससे अधिक होना चाहिए। यह गारंटी देता है कि कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत है।
  • क्लेम रिजेक्शन रेश्यो : देखें कि कंपनी का अस्वीकृति अनुपात बहुत अधिक न हो।
  • शिकायत निवारण : शिकायत समाधान अनुपात अच्छा व ऑनलाइन सेवा और कॉल सेंटर प्रतिक्रिया तेज हो।
क्लेम सेटलमेंट रेश्याे और प्रीमियम के बीच संतुलन बनाएं...
सभी कंपनियों के प्रीमियम की तुलना करें, लेकिन केवल सस्ते प्रीमियम के आधार पर निर्णय न लें। पॉलिसी के दस्तावेज को ध्यान से पढ़ें। जैसे-क्या कोई राइडर आवश्यक है?

वित्त वर्ष 2023-24 में बीमा कंपनियों का क्लेम सेटलमेंट रेश्यो
 
बीमा कंपनी  कुल दावा पॉलिसी संख्या 30 दिनों में भुगतान की गई पॉलिसी संख्या 30 दिनों में भुगतान किए दावे (% में)
एलआईसी 8,29,318 7,99,612 96.42
एसबीआई लाइफ 37,724 37,344 98.99
एक्सिस मैक्स लाइफ 19,569 19,529 99.79
एचडीएफसी 19,338 19,333 99.97
बजाज आलियांज 14,695 14,662 99.78
आईसीआईसीआई प्रू 13,411 12,997 97.09
टाटा एआईए 6,375 6,348 99.58
आदित्य बिड़ला सनलाइफ 6,203 6,201 99.97
पीएनबी मेटलाइफ 5,679 5,664 99.74
कोटक महिंद्रा 4,300 4,300 100.00
श्रीराम 3,799 3,752 98.76
इंडियाफर्स्ट 3,300 3,298 99.94
भारती एक्जा 1,996 1,996 100.00
फ्यूचर जनरली 931 931 100.00
अवीवा 775 775 100.00
एडलवाइस लाइफ 518 518 100.00
स्रोत: हैंडबुक ऑन इंडियन इंश्योरेंस स्टैटिस्टिक्स 2023-24, IRDAI
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जीवन बीमा पहली और बुनियादी जरूरत
जीवन बीमा का बाजार पूरी तरह से बदल रहा है। लोग इस बदलाव को समझ रहे हैं। बीमा बचत या निवेश नहीं, परिवार की वास्तविक सुरक्षा है। महामारी की यही नसीहत है, जीवन की अनिश्चितता किसी भी निवेश योजना से बड़ी हकीकत है। बीमा बेचने वालों के लिए यह आग्रह की वस्तु है, लेकिन समझदार ग्राहक के लिए यह एक बुनियादी और अपरिहार्य जरूरत है। अपनी वास्तविक वित्तीय जरूरतों का आकलन करके ही सही बीमा खरीदना चाहिए। -नितिन पांडे, चेयरमैन एंड एमडी, इंस्टापॉलिसी इंश्योरेंस ब्रोकिंग प्रा. लि.

जीवन बीमा बाजार का बदलता रुझान
वित्त वर्ष टर्म प्लान (%) यूलिप/एंडॉमेंट (%)
2021-22 22% 78%
2022-23 30% 70%
2023-24 38% 62%
स्रोत: IRDAI

कैसा हो आपका बीमा
  • आपकी वार्षिक आय का कम से कम 15–20 गुना कवरेज होना चाहिए।
  • बजट में आने वाला और लंबी अवधि तक बनाए रख सकने वाला प्लान चुनें।
  • कंपनी का ऑनलाइन पोर्टल, चैटबॉट और क्लेम ट्रैकिंग एप होना चाहिए।
  • एक्सीडेंट, क्रिटिकल इलनेस, इनकम बेनिफिट जैसे ऐड-ऑन जरूर लें।
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