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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, कॉल ड्रॉप होने पर टेलिकॉम कंपनियों को नहीं देना होगा जुर्माना

Wed, 11 May 2016 12:29 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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कॉल ड्रॉप पर टेलिकॉम कंपनियों को नहीं देना पड़ेगा जुर्माना - फोटो : getty
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दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ट्राई ने कॉल ड्रॉप होने की स्थिति में टेलिकॉम कंपनियों को जुर्माना चुकाने का आदेश दिया था। अब ट्राई के इस आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।
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सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि कॉल ड्रॉप के लिए सिर्फ टेलिकॉम कंपनियां ही दोषी नहीं होती हैं। कई बार खराब गुणवत्ता के मोबाइल फोन की वजह से भी कॉल ड्रॉप की समस्या आती है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से टेलिकॉम कंपनियों का काफी राहत मिली है। SC says 'TRAI recommendation making it mandatory for telecos to compensate subscribers for call drop is arbitrary & non-transparent — ANI (@ANI_news) May 11, 2016
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क्या था ट्राई का प्रस्ताव

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकार (ट्राई) के प्रस्ताव के अनुसार कॉल शुरू होने के पांच सेकंड के भीतर कॉल ड्रॉप होने पर कोई चार्ज नहीं लगता। अगर पांच सेकंड के बाद कॉल ड्रॉप होती तो उतना ही चार्ज लगता जितनी कॉल हुई है। 

यानि कि एक रुपए प्रतिमिनट कॉल प्लान के दौरान 30 सेकंड में कॉल ड्रॉप हो जाती है तो 30 सेकंड का ही चार्ज लगता। वहीं कॉल ड्रॉप के ऐवज में सर्विस प्रोवाइडर कंपनी को इसके लिए ग्राहक को एक रुपए का हर्जाना भी देना पड़ता। ट्राई के मुताबिक कॉल ड्रॉप की यह भरपाई दिन में तीन कॉल ड्रॉप तक सीमित रखी गई थी। 

कैसे मिलनी थी जुर्माने की राशि

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकार (ट्राई) के अनुसार दूरसंचार परिचालकों को एसएमएस या यूएसएसडी के जरिए कॉल करने वाले ग्राहकों कॉल ड्रॉप के चार घंटे के भीतर एक एसएमएस भेजना होगा और कॉल ड्रॉप के हर्जाने की राशि उसके अकाउंट में भेजी जानी थी।

जबकि पोस्ट पेड कस्टमर के लिए अगले बिल में यह राशि एडजस्ट करने का आदेश दिया था। ट्राइ का मानना था कि यह व्यवस्‍था लागू होने से फोन ग्राहकों को काफी हद तक कॉल ड्रॉप की समस्या से निजात मिल सकेगी।
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