हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डीके सुनील ने लड़ाकू विमान तेजस की मजबूत सुरक्षा विशेषताओं की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि विमान पूरी तरह से सुरक्षित है और दुबई एयर शो में जो हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी। सुनील ने विश्वास जताया कि इस घटना से विमान के भविष्य के उपयोग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
एचएएल के अध्यक्ष ने कहा कि तेजस में कोई समस्या नहीं है , यह पूरी तरह सुरक्षित है और इसका सुरक्षा रिकॉर्ड दुनिया में सर्वश्रेष्ठ है। दुबई में आपने जो देखा वह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी।
उन्होंने आगे कहा कि मुझे लगता है कि जैसे-जैसे देश विकसित होते हैं और अपनी तकनीक विकसित करते हैं, हम विभिन्न चरणों से गुजरते हैं। हमारे पास नवीनतम क्षमता वाला 4.5 पीढ़ी का विमान है। यह एक शानदार सफलता है और हम सभी को इस पर गर्व होना चाहिए। हमेशा कुछ लोग इसका विरोध करेंगे और सवाल उठाएंगे, लेकिन यह हमें और मजबूत होने से नहीं रोक पाएगा। मैं आपको पूरी तरह से आश्वस्त कर सकता हूं कि यह एक बिल्कुल सुरक्षित विमान है और इसका तेजस के भविष्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
एचएएल के अध्यक्ष ने यह भी कहा कि कंपनी वैश्विक खिलाड़ी बनने के प्रयास में निर्यात पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। निर्यात भारत सरकार और कंपनी की भागीदारी का परिणाम है। यह हमारे द्वारा निर्मित क्षमता का तार्किक विस्तार है।
दुबई एयरशो में हुई दुर्घटना, हल्के लड़ाकू विमान तेजस से जुड़ी दूसरी ऐसी दुर्घटना है, जब से यह 10 साल पहले भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल हुआ था। पिछले साल मार्च में जैसलमेर के पास हुई पिछली घटना में पायलट सुरक्षित बच गया था।
भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने पहले पुष्टि की थी कि दुबई के अल मकतूम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक निम्न-स्तरीय एरोबैटिक प्रदर्शन के दौरान विमान के नीचे गिरने और उसमें आग लगने से पायलट की मौत हो गई। तेजस मार्क-1 विमान आठ मिनट तक हवाई कलाबाजी कर रहा था, तभी वह कम ऊंचाई पर नेगेटिव जी-टर्न से उबरने में विफल रहा, जिसके परिणामस्वरूप विमान घातक रूप से नीचे उतरा और दर्शकों के सामने विस्फोट हो गया। दुबई एयर शो के फुटेज में विमान जमीन से टकराता और घना काला धुआं उठता दिखाई दे रहा था। आपातकालीन दल घटनास्थल पर पहुंचे, लेकिन विंग कमांडर नमांश स्याल विमान से बाहर नहीं निकल पाए और उन्हें गंभीर चोटें आईं।