श्रीलंका में आर्थिक संकट के कारण चाय उत्पादन में आई कमी की भरपाई भारत कर सकता है। टी एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से यह बात कही गई है। टीएआई के महासचिव पीके भट्टाचार्य ने कहा कि भारतीय चाय बागान मालिकों की ओर से उत्पादित पारंपरिक किस्म की कीमतों में वृद्धि से यह बात साबित होती है। चाय के ऑक्शन प्रक्रिया में लगभग 75 रुपये से 100 रुपये प्रति किलोग्राम की तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है।
भारत में सालाना लगभग 110 से 120 मिलियन किलोग्राम परंपरागत चाय का उत्पादन होता है जबकि श्रीलंका में 300 मिलियन किलोग्राम होता है। भट्टाचार्य ने कहा है कि श्रीलंका में आर्थिक संकट के कारण उसके परंपरागत चाय उत्पादन में गिरावट आई है।
टीएआई की ओर से कहा गया है कि जुलाई 2022 तक श्रीलंका में परंपरागत चाय का उत्पादन 2021 की इसी अवधि की तुलना में लगभग 19 प्रतिशत गिर गया। मीडिया से बातचीत में भट्टाचार्य ने कहा है कि यदि वर्तमान स्थिति जारी रहती है तो श्रीलंका में पारंपरिक चाय के उत्पादन में लगभग 100 मिलियन किलोग्राम की कमी आ सकती है जिसकी भरपाई भारतीय उत्पादक कर सकते हैं।
भारतीय निर्यातक यूएई और ईरान के बाजारों में भी अपनी पहुंच बनाने में सक्षम हैं जो प्रमुख रूप से परंपरागत चाय के उपभोक्ता देश हैं। टीएआई ने कहा है कि जुलाई 2022 तक भारतीय चाय के निर्यात में लगभग नौ प्रतिशत की वृद्धि हुई और इस पूरे वर्ष के दौरान चाय का कुल निर्यात 20 करोड़ किलोग्राम तक हो सकता है।
सीआईएस देशों के बाद यूएई भारतीय चाय का एक प्रमुख उपभोक्ता है। इसने जनवरी से जून के दौरान 15.86 मिलियन किलोग्राम का आयात किया है जबकि एक साल पहले की अवधि में यह आंकड़ा 6.76 मिलियन किलोग्राम था। चाय बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार ईरान ने इस अवधिक के दौरान 11.43 मिलियन किलोग्राम चाय का आयात किया जबकि 2021 की इसी अवधि में यह 10.04 मिलियन किलोग्राम था।