बजट में घोषित ‘आयकर चार्टर’ को सांविधानिक दर्जा मिलेगा और आयकर विभाग द्वारा समयबद्ध सेवाओं के द्वारा नागरिकों को सशक्त बनाया जाएगा। सीबीडीटी चेयरमैन प्रमोद चंद्र मोदी ने मंगलवार को यह बात कही। उन्होंने कहा कि इस चार्टर को जल्द ही अधिसूचित कर दिया जाएगा और एक बार अस्तित्व में आने के बाद इस कर प्रशासन को लागू करने वाला भारत सिर्फ ‘तीसरा या चौथा’ देश बन जाएगा।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी), आयकर विभाग के लिए नीतियां बनाता है। पीसी मोदी ने एक साक्षात्कार में कहा, ‘हम आयकरदाताओं पर पूरा भरोसा करते हैं और एक प्रवर्तन इकाई के तौर पर हम सेवाओं पर केंद्रित विभाग बनने पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।’
उन्होंने कहा, ‘हम स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहन देने की कोशिश कर रहे हैं और इस प्रक्रिया में हम अपने ऊपर यह अनुशासन लागू करने की भी कोशिश कर रहे हैं कि हम एक निश्चित समयसीमा के भीतर और उचित बेंचमार्क के साथ इन सेवाओं को उपलब्ध कराएं। इन सेवाओं को हासिल करना करदाताओं का अधिकार भी है।’
इससे पहले मोदी ने कहा था कि मौजूदा नागरिक चार्टर के माध्यम से ये सेवाओं प्रशासनिक तंत्र का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा, ‘अब हम इसे सांविधानिक मान्यता दे रहे हैं। एक बार कानून बनने के बाद इसका पालन जरूरी हो जाएगा। अभी तक इसके पालन की उम्मीद की जाती थी, लेकिन अब यह बाध्यकारी होने जा रहा है। काफी हद तक करदाता इससे सशक्त होने जा रहे हैं।’
पीसी मोदी ने कहा कि कर भुगतान, अग्रिम कर और टीडीएस के संबंध में करदाता के कर्तव्यों का उल्लेख पहले ही आयकर अधिनियम में किया जा चुका है। उन्होंने कहा, ‘हम इसे कानून का रूप देने वाले दुनिया के तीसरे या चौथे देश होंगे। मुझे लगता है कि अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में यह व्यवस्था लागू है। इसलिए यह एक बड़ा कदम है और हम एक बड़ी जिम्मेदारी ले रहे हैं।’