टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग रोकने के लिए टाटा ट्रस्ट की ओर से हर कोशिश जारी है। अब टाटा संस में 66 प्रतिशत की बहुलांश हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स ने कंपनी को शेयर बाजार में लिस्ट होने से बचाने और इसे एक अनलिस्टेड प्राइवेट कंपनी के रूप में बनाए रखने के लिए एक नया प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के तहत टाटा समूह की दो प्रमुख ऑपरेटिंग कंपनियों का विलय टाटा संस में करने की योजना बनाई गई है।
टाटा ट्रस्ट्स द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, 'टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड' (टीईएसएस) और 'टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स' (टीसीई) का विलय समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड (टीएसपीएल) के साथ किया जाएगा। इस विलय का मुख्य उद्देश्य टाटा संस को नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (एनबीएफसी) और कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (सीआईसी) की श्रेणी से बाहर निकालना है।
टाटा संस के इस प्रस्तावित पुनर्गठन से कंपनी की आय और परिसंपत्तियों की संरचना में बड़ा बदलाव आएगा। 31 मार्च 2026 तक के वित्तीय आंकड़ों के अनुसार:
यह मामला तब गंभीर हुआ जब 2022 में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने टाटा संस को 'अपर-लेयर एनबीएफसी' के रूप में वर्गीकृत किया था। इस श्रेणी में आने वाली कंपनियों के लिए शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य होता है। टाटा संस ने एनबीएफसी ढांचे से बाहर निकलने के लिए आरबीआई से अनुरोध किया था, लेकिन सितंबर में आरबीआई ने इस याचिका को खारिज कर दिया था।
इसके अलावा, टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बोर्ड के बीच चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल को लेकर भी मतभेद रहे हैं। ऐतिहासिक रूप से, यह नया कदम टाटा संस के पुराने व्यावसायिक ढांचे को बहाल करता है। 2004 से पहले टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) टाटा संस का ही एक डिविजन थी। 2004 में टीसीएस के अलग होने के बाद टाटा संस को गैर-बैंकिंग, गैर-वित्तीय कंपनी के रूप में वर्गीकृत किया गया था।
टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस के बोर्ड से इस पुनर्गठन प्रस्ताव पर विचार करने और आगे की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया है। इस अमलगमेशन को लागू करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के 'आरबीआई (एनबीएफसी - वॉलिंटरी अमलगमेशन) दिशानिर्देश, 2025' के तहत केंद्रीय बैंक से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) प्राप्त करना अनिवार्य होगा। यदि आरबीआई से इस मर्जर को मंजूरी मिल जाती है, तो टाटा संस अपनी ऐतिहासिक अनलिस्टेड प्राइवेट कंपनी की पहचान को सुरक्षित रखते हुए अपने परिचालन को जारी रख सकेगी।