महाराष्ट्र स्टेट चैरिटी कमिश्नर (MSCC) ने टाटा ट्रस्ट्स को 16 मई को निर्धारित न्यासी मंडल की प्रस्तावित बैठक स्थगित करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश सर रतन टाटा ट्रस्ट के न्यासी मंडल की संरचना से संबंधित है। नियमों के कथित उल्लंघन की लंबित जांच का हवाला देते एमएससीसी ने कहा है कि ई-मेल के माध्यम से दर्ज शिकायतों में गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं। हालांकि, आयुक्त अमोघ एस. कलोटी के आदेश को टाटा ने एकतरफा बताया है। जानिए क्या है पूरा मामला
महाराष्ट्र राज्य चैरिटी आयुक्त (MSCC) ने टाटा ट्रस्ट्स को 16 मई को होने वाली बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ की महत्वपूर्ण बैठक स्थगित करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश सर रतन टाटा ट्रस्ट के बोर्ड संरचना से संबंधित कथित नियमों के उल्लंघन की लंबित जांच के कारण दिया गया है। टाटा ट्रस्ट्स ने इस निर्देश को एकतरफा बताया है।
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पहले 8 मई को होनी थी बैठक, अब MSCC ने जांच के आदेश दिए
चैरिटी आयुक्त ने ट्रस्ट को जांच पूरी होने तक ऐसी कोई भी बैठक न करने को कहा है। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस का 66 फीसदी हिस्सा है। यह बैठक टाटा संस की लिस्टिंग और अध्यक्ष एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति जैसे मुद्दों पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण थी। 8 मई को होनी थी, जिसे 16 मई के लिए स्थगित किया गया था। टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि यह निर्देश केवल सर रतन टाटा ट्रस्ट से संबंधित है और बिना किसी सूचना या सुनवाई के जारी किया गया था। महाराष्ट्र राज्य, मुंबई के चैरिटी आयुक्त अमोघ एस कालोटी ने जांच का आदेश दिया है।
नियमों के उल्लंघन की शिकायत
चैरिटी आयुक्त ने महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स अधिनियम की धारा 36ए(1) के तहत निर्देश जारी किया है। अधिवक्ता कात्यायनी अग्रवाल ने 18 अप्रैल, 2026 को ईमेल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने धारा 30ए(2) के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी। टाटा ट्रस्ट्स के उपाध्यक्ष वेणु श्रीनिवासन ने भी चैरिटी आयुक्त को एक प्रतिवेदन दिया था।
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ट्रस्टी संरचना पर विवाद
गौरतलब है कि सितंबर 2025 में संशोधित धारा के अनुसार, आजीवन ट्रस्टियों की संख्या कुल बोर्ड सदस्यों के 25 फीसदी से अधिक नहीं हो सकती। सर रतन टाटा ट्रस्ट में छह ट्रस्टियों में से तीन आजीवन ट्रस्टी हैं। इनमें जिमी नवल टाटा, जहांंगीर एचसी जहांंगीर और नोएल नवल टाटा शामिल हैं। यह संख्या बोर्ड का 50 फीसदी है, जो वैधानिक सीमा से काफी अधिक है। चैरिटी आयुक्त ने अग्रवाल और श्रीनिवासन द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीर बताया।