गौतम ने बताया कि ऐसे क्लस्टर से जुड़े परिवार के युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिए इस समय असम, नगालैंड और ओडिशा में एक-एक केंद्र बनाए जा चुके हैं, जबकि अभी छह और केंद्र बनने हैं। इन केंद्रों में देश के शीर्ष संस्थानों से निकले विशेषज्ञ बुनाई, डिजाइनिंग, मार्केटिंग आदि के आधुनिक तरीके बता रहे हैं। केंद्र में ही आधुनिक करघे लगाये गए हैं, ताकि उन्हें इसका व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा सके। उन्हें डिजाइनिंग का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, साथ ही जो मार्केटिंग में रुचि लेते हैं, उन्हें इसका गुर भी सिखाया जा रहा है। यही नहीं, उन्हें कच्चे माल की उपलब्धता और बाजार तक पहुंच बनाने में भी सहयोग किया जाता है।
कैसे करते हैं यह सब, इस पर गौतम ने कहा कि पहले क्लस्टर के बुजुर्ग बुनकरों से मिलते हैं, उन्हें समझाते हैं कि इस तरीके से उनका पारंपरिक कौशल जीवित रह सकता है। फिर इच्छुक युवाओं की सूची बनाई जाती है, उनकी लिखित परीक्षा ली जाती है। इसे पास करने वालों का इंटरव्यू लिया जाता है, तब जाकर प्रशिक्षण केंद्र में प्रवेश मिलता है। हालांकि इस परीक्षा में किसी को अभी तक फेल नहीं किया गया है। जो लिखित परीक्षा क्लियर नहीं कर सके, उन्हें फिर से तैयार किया जाता है, ताकि इंटरव्यू तक पहुंच सके।
इन्हीं बुनकरों में से कुछ को उद्यमी बनने का प्रशिक्षण मिलेगा, तो किसी को डिजाइनर बनने का, तो किसी को बुनाई विशेषज्ञ बनने का। इसके साथ ही उन्हें मार्केटिंग भी सिखाना है, ताकि देशभर या विदेश से आने वाली चिट्ठी का जवाब दे सके। इसलिए उनके गणित, सामान्य ज्ञान, रीजनिंग, हिंदी-अंग्रेजी ज्ञान को आंकते हैं। यदि उन्हें नहीं आता है तो यह भी सिखाते हैं। उनसे बुनाई का भी सवाल पूछा जाता है ताकि उन्हें धागे, रंग, ताना-भरनी आदि की जानकारी है या नहीं।