भारतीय कॉरपोरेट जगत के सबसे बड़े होल्डिंग समूह टाटा संस के बोर्ड ने गुरुवार को एन चंद्रशेखरन को चेयरमैन के रूप में पांच साल के नए कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्त करने के पक्ष में मतदान किया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की ओर से एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने के आवेदन को खारिज किए जाने के बाद टाटा संस के शेयर बाजार में लिस्ट होने की संभावनाएं दोबारा बढ़ गई हैं। विनियामक दबाव के बीच बोर्ड ने संभावित लिस्टिंग से पहले प्रबंधन में निरंतरता बनाए रखने के लिए यह बड़ा कदम उठाया है।
गुरुवार को हुई तीन घंटे की बोर्ड बैठक में टाटा संस के भविष्य को लेकर दो अहम फैसले हुए। पहला, रिजर्व बैंक के निर्देशों का पालन करते हुए कंपनी को सार्वजनिक (गो पब्लिक) करने और बाजार में लिस्ट कराने की मंजूरी दी गई। दूसरा, कंपनी के मौजूदा चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल को पांच साल के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव पास किया गया। इस बैठक में नेतृत्व और लिस्टिंग को लेकर सदस्यों के बीच सहमति बनाने की कोशिश हुई, लेकिन वोटिंग के दौरान टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा अल्पमत में रह गए और बोर्ड के अन्य निदेशकों ने चंद्रशेखरन के विस्तार और लिस्टिंग के पक्ष में मतदान किया।
टाटा संस की लिस्टिंग का यह पूरा मामला भारतीय रिजर्व बैंक के विनियामक ढांचे से जुड़ा है। सितंबर 2022 में आरबीआई ने टाटा संस को 'अपर-लेयर' गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में वर्गीकृत किया था, जिसके तहत कंपनी के लिए तीन साल के भीतर यानी सितंबर 2025/2026 तक शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य था।
टाटा संस पिछले एक साल से अधिक समय से शेयर बाजार में लिस्ट होने की प्रक्रिया से बचने की कोशिश कर रही थी। कंपनी ने इस विनियामक बाध्यता से बचने के लिए 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया कर्ज भी चुका दिया था और अपना एनबीएफसी (एनबीएफसी) रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने का आवेदन आरबीआई में दाखिल किया था।हालांकि, 11 सितंबर 2026 को आरबीआई ने टाटा संस के इस आवेदन को खारिज कर दिया और कंपनी को तुरंत लिस्टिंग की दिशा में कदम बढ़ाने का सख्त निर्देश दिया।
टाटा संस के स्वामित्व ढांचे में लिस्टिंग को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी:
नटराजन चंद्रशेखरन फरवरी 2017 से टाटा संस के चेयरमैन पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वर्ष 2022 में उन्हें सर्वसम्मति से दूसरे पांच साल के कार्यकाल के लिए चुना गया था, जो 20 फरवरी 2027 तक वैध था।
टाटा संस का सार्वजनिक होना भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक साबित होगा। आरबीआई के निर्देशों का अनुपालन करने से जहां एक तरफ टाटा संस में कॉरपोरेट गवर्नेंस और पारदर्शिता का स्तर और ऊंचा होगा, वहीं दूसरी तरफ शापूरजी पालोनजी ग्रुप जैसे अल्पसंख्यक शेयरधारकों को अपनी हिस्सेदारी का पारदर्शी मूल्यांकन मिलेगा। इसके अलावा, एन चंद्रशेखरन का पांच साल का विस्तार समूह की प्रमुख कंपनियों को नीतिगत निरंतरता और स्थिरता प्रदान करेगा।