टाटा समूह के भीतर कारोबार के भविष्य और कंपनी की लिस्टिंग को लेकर मतभेद एक बार फिर सामने आ गए हैं। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा संस के बोर्ड के सामने दो अहम मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने कंपनी के कारोबार का पुनर्गठन करने और एसपी ग्रुप की हिस्सेदारी से जुड़े प्रस्ताव पर जानकारी मांगी है। नोएल चाहते हैं कि इन दोनों मुद्दों पर 26 नवंबर को होने वाली बोर्ड बैठक में चर्चा हो और फैसला लिया जाए। उनका पहला प्रस्ताव टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने से बचाने की कोशिश से जुड़ा है। वहीं, दूसरा मुद्दा शापूरजी पल्लोनजी (एसपी) ग्रुप की ओर से 25 हजार करोड़ रुपये जुटाने के लिए अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचने की योजना से जुड़ा है।
नोएल टाटा ने टाटा संस के सचिव सुप्रकाश मुखोपाध्याय को दो अलग-अलग पत्र भेजे हैं। उन्होंने ये पत्र टाटा संस के बोर्ड सदस्य के तौर पर लिखे हैं। सूत्रों के मुताबिक, बोर्ड का कोई भी सदस्य 15 दिन पहले सूचना देकर किसी मुद्दे को बैठक के एजेंडे में शामिल करने की मांग कर सकता है। नोएल ने इसी प्रक्रिया के तहत दोनों मुद्दे उठाए हैं। पहले पत्र में उन्होंने टाटा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स का टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड में विलय करने का प्रस्ताव रखा है। उनका मानना है कि इससे टाटा संस की कारोबारी स्थिति बदल सकती है और कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की अनिवार्यता से राहत मिल सकती है। दूसरा पत्र एसपी ग्रुप की हिस्सेदारी बेचने की योजना पर टाटा संस प्रबंधन से विस्तृत जानकारी मांगने के लिए है।
टाटा संस का पुनर्गठन क्यों करना चाहते हैं नोएल टाटा?
- नोएल टाटा के पहले पत्र का मुख्य मुद्दा टाटा समूह की दो कंपनियों का टाटा संस में विलय करना है। ये कंपनियां टाटा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स हैं। प्रस्ताव के अनुसार, दोनों कंपनियों के कारोबार को टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड में मिला दिया जाएगा।
- इससे टाटा संस केवल समूह की होल्डिंग कंपनी नहीं रहेगी, बल्कि सीधे कारोबारी गतिविधियों में भी शामिल हो जाएगी। आसान भाषा में समझें तो अभी टाटा संस समूह की कंपनियों में निवेश और उनकी हिस्सेदारी संभालने वाली मुख्य कंपनी है।
- प्रस्ताव लागू होने पर इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग का कारोबार भी सीधे इसके तहत आ जाएगा। नोएल के पक्ष का मानना है कि इस बदलाव से टाटा संस की मौजूदा नियामकीय स्थिति बदल सकती है। इससे कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने से बचाने का रास्ता निकल सकता है।
आरबीआई ने टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर क्या फैसला दिया था?
टाटा संस की लिस्टिंग का मामला भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के एक फैसले से जुड़ा है। आरबीआई ने 11 सितंबर को टाटा संस को पत्र भेजा था। इसमें कंपनी को पंजीकरण से हटाने की मांग वाली अर्जी खारिज कर दी गई थी। इसका मतलब है कि टाटा संस को नियामक के नियमों के अनुसार शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना पड़ सकता है। आरबीआई टाटा संस को एक मुख्य निवेश कंपनी यानी कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी मानता है। ऐसी कंपनी का मुख्य काम दूसरी कंपनियों में निवेश और हिस्सेदारी रखना होता है। इसी श्रेणी के कारण उस पर लिस्टिंग से जुड़ी नियामकीय शर्तें लागू होती हैं। नोएल ने अपने पत्र में आरबीआई के 11 सितंबर के फैसले पर चर्चा और मतदान कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी बताया कि इस फैसले के बाद टाटा ट्रस्ट्स के दो बड़े ट्रस्टों ने 26 सितंबर को पुनर्गठन का प्रस्ताव भेजा था।
टाटा संस की लिस्टिंग पर नोएल और बोर्ड के बीच मतभेद क्यों हैं?
टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर नोएल टाटा और कंपनी के बोर्ड के बीच पहले से मतभेद हैं। 17 सितंबर को हुई बोर्ड बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। उस समय बोर्ड ने नियामक के आदेश का पालन करने के पक्ष में फैसला किया था। इस फैसले में नोएल के पक्ष को समर्थन नहीं मिला था। नोएल का पक्ष मानता है कि टाटा समूह की 150 साल से अधिक पुरानी पहचान और काम करने के तरीके को बनाए रखना जरूरी है। उनका तर्क है कि कंपनी के निजी रहने से उस पर शेयर बाजार के निवेशकों का दबाव नहीं रहेगा। इससे समूह लंबे समय के लिए बड़े फैसले और निवेश कर सकेगा। दूसरी ओर, टाटा संस का प्रबंधन मानता है कि कंपनी को नियामक के आदेश का पालन करना होगा। यही मतभेद अब बोर्ड के सामने फिर से आने वाला है। यदि पुनर्गठन का प्रस्ताव मंजूर होता है, तो इसे लागू करने के लिए आरबीआई, राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) और केंद्र सरकार के कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय की मंजूरी भी जरूरी होगी।
एसपी ग्रुप के 25 हजार करोड़ रुपये जुटाने की योजना पर क्या पूछा नोएल ने?
नोएल टाटा ने अपने दूसरे पत्र में शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप की हिस्सेदारी से जुड़े प्रस्ताव पर जानकारी मांगी है। एसपी ग्रुप टाटा संस में अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचकर 25 हजार करोड़ रुपये जुटाना चाहता है। नोएल ने टाटा संस के प्रबंधन से पूछा है कि इस प्रस्ताव पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है। उन्होंने यह भी जानना चाहा है कि प्रबंधन ने इस प्रस्ताव का मूल्यांकन किस आधार पर किया है। यानी कंपनी ने हिस्सेदारी बेचने की योजना को किस तरह जांचा और उस पर क्या राय बनाई है। नोएल ने अपने पत्र के साथ एक प्रस्तावित प्रस्ताव का मसौदा भी लगाया है। वह चाहते हैं कि बोर्ड बैठक में इस मुद्दे पर पूरी जानकारी रखी जाए। यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि एसपी ग्रुप की टाटा संस में हिस्सेदारी लंबे समय से समूह के स्वामित्व और वित्तीय संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।
नोएल टाटा और एन चंद्रशेखरन के बीच क्या हुआ था?
नोएल के दोनों पत्र ऐसे समय आए हैं, जब टाटा समूह के भीतर पिछले कुछ दिनों से लगातार हलचल रही है। इस सप्ताह की शुरुआत रविवार को हुई थी। उस दिन नोएल टाटा और टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के बीच दक्षिण मुंबई स्थित नोएल के आवास पर बातचीत हुई थी। इसे दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने की कोशिश के तौर पर देखा गया। इसके बाद सोमवार को नोएल ने टाटा संस को एक और पत्र भेजा था। इसमें उन्होंने चंद्रशेखरन की चेयरमैन के तौर पर दोबारा नियुक्ति को चुनौती दी थी। इसके बाद यह विवाद राजनीतिक मुद्दा भी बन गया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मामले को लेकर सरकार पर हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया था। अब 26 नवंबर की बोर्ड बैठक में पुनर्गठन और एसपी ग्रुप की हिस्सेदारी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की मांग ने इस विवाद को फिर केंद्र में ला दिया है।