चीन और अमेरिका के राष्ट्रीय ध्वज (फाइल)
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अमेरिका का व्यापार घाटा कम होने की संभावना
विेशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देशों ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि व्यापार वार्ता सकारात्मक होगी, अब जब अमेरिका और चीन के बीच पारस्परिक टैरिफ घोषणा हो गई है, तो इससे व्यापार में वृद्धी होगी, इसके साथ ही अमेरिका के 1.2 ट्रिलियन डॉलर के विशाल व्यापार घाटे को कम करने काफी सहायता इस समझौते से मिलेगी। चीन और अमेरिका की घोषणा के बाद ही एशियाई बाजारों में उछाला आया, हांगकांग में 3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि शंघाई में लगभग 1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। व्यापार समझौता की घोषणा के बाद जापान और ताइवान के स्टॉक एक्सचेंजों में बढ़त दर्ज की गई। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर के अनुसार अमेरिका ने चीनी वस्तुओं पर 145 प्रतिशत टैरिफ को 115 प्रतिशत अंक घटाकर 30 प्रतिशत करने पर सहमति व्यक्त की है, जबकि चीन ने दरों को घटाकर 10 प्रतिशत करने पर सहमति व्यक्त की है।
घोषणा से चीन और अमेरिका के बीच तनाव होगा कम
भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) के अध्यक्ष एससी रल्हन ने कहा कि यह घोषणा दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार तनाव में महत्वपूर्ण कमी लाएगी। उन्होंने कहा, "हालांकि इस तरह के घटनाक्रम वैश्विक व्यापार स्थिरता के लिए मोटे तौर पर सकारात्मक हैं, लेकिन वे भारत के लिए चुनौतियां और अवसर दोनों प्रस्तुत करते हैं।" उन्होंने कहा कि टैरिफ में कमी से इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और रसायन जैसे उच्च मूल्य वाले क्षेत्रों में अमेरिका-चीन द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि होने की संभावना है।
भारतीय निर्यातकों के बढ़ सकती है प्रतिस्पर्धा
उन्होंने कहा कि इससे दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे बाजारों में भारतीय निर्यातकों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है, जहां भारत ने हाल ही में अमेरिका-चीन व्यापार बाधाओं का लाभ उठाते हुए अपनी पैठ बनाई है। हालांकि, रल्हन ने कहा कि भारत इस बदलाव का लाभ उन क्षेत्रों में निर्यात को मजबूत करने के लिए उठा सकता है जो अमेरिका-चीन व्यापार से अपेक्षाकृत अछूते हैं, जैसे फार्मास्यूटिकल एपीआई, रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, कार्बनिक रसायन और आईटी-सक्षम सेवाएं।
जानकार बोले- अमेरिका के साथ सक्रिय रूप से जुड़े भारत
उन्होंने कहा, "भारत को अपनी तरजीही व्यापार पहुंच को सुरक्षित और विस्तारित करने के लिए अमेरिका के साथ सक्रिय रूप से जुड़ना चाहिए, तथा एक विश्वसनीय वैकल्पिक स्रोत गंतव्य के रूप में अपनी भूमिका पर जोर देना चाहिए।" रल्हन ने कहा कि टैरिफ कटौती की अस्थायी प्रकृति के कारण कंपनियां मेक इन इंडिया और पीएलआई योजनाओं के तहत भारत में विनिर्माण का विस्तार करके भविष्य की अस्थिरता से बचाव कर सकती हैं, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो घटकों और वस्त्रों के मामले में।