भारत ने पिछले वित्त वर्ष में 540 टन मैग्नेट आयात किया था। इसमें से 80 फीसदी से अधिक चीन से आया था। मई के अंत तक भारतीय कंपनियों के लगभग 30 आयात अनुरोधों को भारत सरकार ने मंजूर किया था। लेकिन, अभी तक चीनी अधिकारियों ने इस संबंध में किसी को भी अनुमति नहीं दी है।
चीन से रेयर अर्थ मैग्नेट की आपूर्ति में एक महीने से अधिक समय तक व्यवधान रहने से इलेक्ट्रिक सहित यात्री वाहनों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इससे घरेलू वाहन उद्योग की रफ्तार धीमी हो सकती है।
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क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश वाहन निर्माताओं के पास वर्तमान में चार से छह सप्ताह का ही भंडार है। ऐसे में लंबे समय तक मैग्नेट की आपूर्ति में देरी से कंपनियों को ईवी मॉडलों के उत्पादन को जुलाई से टालना पड़ सकता है। अगर आपूर्ति संबंधी बाधाएं लंबे समय तक बनी रहीं तो दोपहिया और आईसीई यात्री वाहनों पर इसका ज्यादा प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही, कम लागत वाला यह महत्वपूर्ण मैग्नेट घरेलू वाहन क्षेत्र के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। रेयर अर्थ मैग्नेट आपूर्ति में कमी ऐसे समय आई है, जब वाहन क्षेत्र ईवी को गति देने की तैयारी में है। कंपनियों की आने वाले समय में एक दर्जन से अधिक नए ईवी मॉडल लॉन्च करने की योजना है।
चीनी अधिकारियों ने रोक रखी है मंजूरी
भारत ने पिछले वित्त वर्ष में 540 टन मैग्नेट आयात किया था। इसमें से 80 फीसदी से अधिक चीन से आया था। मई के अंत तक भारतीय कंपनियों के लगभग 30 आयात अनुरोधों को भारत सरकार ने मंजूर किया था। लेकिन, अभी तक चीनी अधिकारियों ने इस संबंध में किसी को भी अनुमति नहीं दी है।
कंपनियों को करना होगा पुनर्मूल्यांकन
क्रिसिल रेटिंग्स की निदेशक पूनम उपाध्याय ने कहा, मैग्नेट की यह कमी वाहन निर्माताओं को आपूर्ति शृंखला रणनीतियों के पुनर्मूल्यांकन के लिए मजबूर कर रही है। वाहन की लागत में 5 फीसदी से भी कम योगदान देने के बावजूद यह मैग्नेट ईवी मोटर और इलेक्ट्रिक स्टीयरिंग सिस्टम के लिए जरूरी हैं। संभावित समस्याओं से निपटने के लिए वाहन निर्माता कंपनियां वियतनाम, इंडोनेशिया, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों में वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं के साथ सक्रिय रूप से संपर्क कर रही हैं।