सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ 10 से भी ज्यादा ट्रेड यूनियनों की हड़ताल से अर्थव्यवस्था को 18000 करोड़ रुपए तक का नुकसान होने की आशंका है। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में इस वजह से फैक्ट्रियां बंद रहीं।
उद्योग संगठन एसोचैम की ओर से लगाए गए अनुमान के मुताबिक देशभर में हड़ताल से तमाम सेवाएं प्रभावित हुईं जिसकी वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था को 16 से 18 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है। संगठन का कहना है कि तमाम सरकारी और निजी क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में उत्पादन का कार्य प्रभावित हुआ। साथ ही तैयार माल के परिवहन में आई रुकावट इस नुकसान को और बढ़ा सकती है।
अखिल भारतीय आयकर कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष अशोक कन्नौजिया ने अमर उजाला को बताया कि प्रत्यक्ष कर विभाग के 600 कार्यालयों में कार्यरत समस्त 60 हजार कर्मचारी इसमें शामिल रहे। उनके यहां दफ्तरों में ताला तक नहीं खुला। जिन अधिकारियों के पास चाभी थी, वे आकर खुद ताला खोल कर अपने दफ्तरों में बैठे। लेकिन उन्हें चाय-पानी तक भी नहीं मिला। इससे उब कर वह भी घंटे भर में कार्यालय से निकल गए।
'सरकार और ट्रेड यूनियन को बातचीत कर रास्ता निकालने की जरूरत'
हड़ताल से जन-जीवन प्रभ्ाावित
वहीं बैंकों में हड़ताल के मसले पर अधिकारी और कर्मचारी बंट गए थे। बैंक अधिकारियों के संगठन एआईबीओसी ने हड़ताल वापस ले ली थी, इस वजह से अधिकारी बैंक आए लेकिन कर्मचारियों के हड़ताल पर होने की वजह से कैश कांउटर नहीं खुल पाए।
अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने एडवांस का काम हुआ जबकि एटीएम से ट्रांजेक्शन हुआ। स्टेट बैंक में काम हुआ। बीमा क्षेत्र में हड़ताल का पूरा असर रहा। सार्वजनिक क्षेत्र की साधारण एवं जीवन बीमा कंपनियों में कर्मचारी हड़ताल पर रहे। साधारण बीमा निगम के एक कर्मचारी ने बताया कि उनके यहां तो आज अधिकतर कर्मचारी कार्यालय आए ही नहीं।
कुछ लोग आए थे, जिन्होंने नारेबाजी की, धरना दिया और वापस घर चले गए। एसोचैम के महासचिव डीएस रावत के मुताबिक परिहवन, व्यापार और होटल देश के सकल घरेलू उत्पाद में बड़ा योगदान रखते हैं। साथ ही बैकिंग और वित्तीय सेवाएं अहम योगदान रखते हैं। ये सभी क्षेत्र इस हड़ताल से प्रभावित हुए हैं।
रावत के मुताबिक सरकार और ट्रेड यूनियन को बातचीत कर कोई बीच का रास्ता निकालना चाहिए। यही इस समस्या का सबसे बेहतर समाधान है। एसोचैम के मुताबिक हड़ताल की वजह से निर्यात भी प्रभावित हुए हैं। बाहर जाने वाले शिपमेंट पर इस हड़ताल का बुरा असर बड़ा है।