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शेयर बाजार में घरेलू निवेशकों का दबदबा: निफ्टी 500 में DII की हिस्सेदारी रिकॉर्ड 20.9% पर, FII का घटा निवेश

Tue, 05 May 2026 06:49 PM IST
Kumar Vivek बिजनेस न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के अनुसार, निफ्टी 500 में घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की हिस्सेदारी 20.9% के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई है, जबकि विदेशी निवेशकों (एफआईआई) ने भारी बिकवाली की है। शेयर बाजार में संस्थागत बदलाव और आगे के आउटलुक की पूरी जानकारी पढ़ें।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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विस्तार
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वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजारों में एक बड़ा ढांचागत बदलाव देखने को मिल रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) जहां लगातार बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) बाजार के लिए सबसे बड़ा सहारा बनकर उभरे हैं। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, मार्च तिमाही में निफ्टी 500 कंपनियों में DII की हिस्सेदारी बढ़कर 20.9 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जबकि विदेशी निवेशकों का स्वामित्व गिरकर 17.1 प्रतिशत रह गया है। 

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बाजार को मिला घरेलू फंड्स का सहारा
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता रही। इस दौरान विदेशी निवेशकों का रुझान नकारात्मक रहा, लेकिन घरेलू निवेशकों ने बाजार को स्थिर रखने में अहम भूमिका निभाई। 

जनवरी-मार्च 2026 की अवधि के दौरान व्यवस्थित निवेश योजना (SIP) के जरिए लगातार आ रहे फंड के समर्थन से DII ने बाजार में 27.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया। इसके विपरीत, इसी अवधि में FII प्रवाह अस्थिर रहा और उन्होंने 15.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर की शुद्ध बिकवाली की। केवल मार्च महीने में ही भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के कारण विदेशी निवेशकों ने 14.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर की भारी निकासी की।
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स्वामित्व में ऐतिहासिक बदलाव
संस्थागत स्वामित्व में इस बड़े बदलाव के कारण मार्च 2026 में निफ्टी 500 में FII-DII स्वामित्व अनुपात सिकुड़कर 0.8 गुना रह गया है। 

  • सालाना आधार पर बदलाव: पिछले एक साल में निफ्टी 500 में DII की हिस्सेदारी 170 आधार अंक (bps) बढ़कर 20.9 प्रतिशत के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई है। 
  • FII में गिरावट: वहीं, एक साल पहले के 18.9 प्रतिशत के मुकाबले FII की हिस्सेदारी गिरकर 17.1 प्रतिशत रह गई है। 
  • अन्य हिस्सेदारी: इस अवधि के दौरान प्रमोटरों की हिस्सेदारी काफी हद तक 49.4 प्रतिशत पर स्थिर रही, जबकि खुदरा निवेशकों की भागीदारी मामूली बढ़त के साथ 12.7 प्रतिशत हो गई।

विभिन्न सेक्टर्स में निवेश का रुझान
विदेशी और घरेलू निवेशकों के निवेश पैटर्न में सेक्टोरल स्तर पर भी स्पष्ट अंतर देखने को मिला है:

  • DII का पसंदीदा सेक्टर: DII ने 24 में से 21 सेक्टर्स में अपना निवेश बढ़ाया है। इनमें मुख्य रूप से प्राइवेट बैंक, टेक्नोलॉजी, टेलीकॉम, रियल एस्टेट, हेल्थकेयर और एनबीएफसी (लेंडिंग) शामिल हैं। हालांकि, ईएमएस (EMS), नॉन-लेंडिंग एनबीएफसी और मेटल सेक्टर में DII की हिस्सेदारी घटी है।
  • FII का रुझान: विदेशी निवेशकों ने बीएफएसआई (BFSI) क्षेत्र में अपना निवेश घटाकर 32.1 प्रतिशत कर दिया है और टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनका निवेश 7.3 प्रतिशत के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। इसके उलट, FII ने मेटल, हेल्थकेयर, यूटिलिटीज और ऑयल एंड गैस सेक्टर में अपना निवेश बढ़ाया है। 

आगे का आउटलुक
निफ्टी 500 के कुल बाजार पूंजीकरण में लार्ज-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों की हिस्सेदारी क्रमशः 67 प्रतिशत, 22 प्रतिशत और 11 प्रतिशत है। रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि घरेलू निवेशक बाजार के उतार-चढ़ाव को सोखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आगे के बाजार परिदृश्य पर मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि "जैसे ही युद्ध का तनाव कम होगा, विदेशी निवेशकों (FII) के प्रवाह के लिए बेहतर माहौल बनने की प्रबल संभावना है"। विदेशी बिकवाली में कमी को भी बाजार द्वारा सकारात्मक रूप से लिया जाएगा, और अगर पूर्ण रूप से सकारात्मक निवेश वापस आता है, तो बाजार में और अधिक तेज रैलियां देखने को मिल सकती हैं।

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