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Stock Market: भारत की कमाई बढ़ी, फिर भी भरोसा घटा; विदेशी निवेशकों को क्यों नहीं भा रहा भारतीय शेयर बाजार?

Thu, 20 Aug 2026 05:12 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारतीय कंपनियों की कमाई बढ़ रही है और चालू तिमाही में विदेशी निवेशकों ने 4 अरब डॉलर से ज्यादा भारतीय शेयरों में लगाए हैं। इसके बावजूद बैंक ऑफ अमेरिका के फंड मैनेजर सर्वे में भारत एशिया का सबसे कम पसंदीदा शेयर बाजार बन गया है। महंगा बाजार, धीमी आर्थिक वृद्धि और एआई से जुड़ी कमजोर संभावनाएं निवेशकों को परेशान कर रही हैं। ऐसे में सवाल है कि कमाई बढ़ने के बावजूद भारत से भरोसा क्यों घट रहा है?
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शेयर बाजार में लगातार गिरावट ने चिंता क्यों बढ़ाई? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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बैंक ऑफ अमेरिका के फंड मैनेजर सर्वे में भारत इंडोनेशिया को पीछे छोड़कर एशिया का सबसे कम पसंदीदा शेयर बाजार बन गया है। सर्वे में 272 अरब डॉलर की संपत्ति संभालने वाले 98 फंड मैनेजर शामिल थे। इनमें 32 फीसदी प्रबंधकों ने कहा कि वे भारतीय शेयरों में कम निवेश कर रहे हैं। यह स्थिति ऐसे समय आई है, जब भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन एशिया के कई प्रमुख बाजारों की तुलना में कमजोर रहा है।

निवेशकों को भारत में सबसे ज्यादा किस बात की चिंता है?

विदेशी निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता भारतीय कंपनियों में एआई से जुड़ी स्पष्ट संभावनाओं का अभाव है। इसके अलावा भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार, सुधारों की धीमी गति और शेयरों का ऊंचा मूल्यांकन भी चिंता बढ़ा रहा है। निवेशकों का मानना है कि भारतीय बाजार में शेयरों की कीमतें पहले से काफी ऊंची हैं, जबकि कंपनियों की भविष्य की वृद्धि को लेकर उतना भरोसा नहीं दिख रहा है। इसके मुकाबले ताइवान और जापान निवेशकों की पसंद बने हुए हैं।

क्या विदेशी निवेशक भारत से पूरी तरह पैसा निकाल रहे हैं?

ऐसा नहीं है। भारत को लेकर सतर्कता बढ़ने के बावजूद चालू तिमाही में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 4 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है। यह क्षेत्रीय उभरते बाजारों में सबसे ज्यादा है। यानी विदेशी निवेशक भारत से पूरी तरह दूरी नहीं बना रहे हैं, लेकिन वे अब निवेश करते समय ज्यादा सावधानी बरत रहे हैं। साल की पहली छमाही में भारतीय शेयरों से रिकॉर्ड विदेशी निकासी हुई थी।

कंपनियों की कमाई बढ़ने के बावजूद बाजार क्यों कमजोर है?

भारतीय कंपनियों के मुनाफे में सुधार हुआ है। हालिया तीन महीने की अवधि में निफ्टी 50 में शामिल कंपनियों की कमाई पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 18 फीसदी बढ़ी है। मार्च के निचले स्तर से निफ्टी करीब 7.5 फीसदी ऊपर आया है। इसके बावजूद इस साल अब तक निफ्टी में करीब 8 फीसदी की गिरावट है। इससे भारत का प्रदर्शन एशिया के प्रमुख बाजारों में दूसरा सबसे खराब रहा है। यही अंतर निवेशकों के लिए चिंता का कारण बन रहा है।

शेयर बाजार में लगातार गिरावट ने चिंता क्यों बढ़ाई?

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम खत्म होने के बाद कूटनीतिक समाधान नहीं निकलने से बाजार पर दबाव बढ़ा। बुधवार को सेंसेक्स लगातार चौथे कारोबारी दिन गिरकर बंद हुआ, जबकि निफ्टी में लगातार सातवें दिन गिरावट दर्ज हुई। सेंसेक्स 325.78 अंक यानी 0.42 फीसदी गिरकर 76,909.68 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी 76.60 अंक यानी 0.32 फीसदी फिसलकर 24,078.30 अंक पर पहुंच गया।

निफ्टी और सेंसेक्स की लगातार गिरावट कितनी बड़ी है?

पिछले चार कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स कुल 1,170.28 अंक यानी 1.49 फीसदी टूट चुका है। वहीं, निफ्टी सात कारोबारी सत्रों में 505.50 अंक यानी करीब 2 फीसदी गिरा है। बाजार में लगातार कमजोरी से निफ्टी की 10 साल से चली आ रही वार्षिक बढ़त की परंपरा टूटने का खतरा भी बना हुआ है। फेडरल रिजर्व की बैठक की विस्तृत जानकारी आने से पहले निवेशकों ने भी जोखिम लेने से परहेज किया।

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भारत के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक वृद्धि, कंपनियों की कमाई और शेयरों के मूल्यांकन के बीच संतुलन बनाने की है। एक तरफ कंपनियों की कमाई में सुधार और विदेशी निवेश की वापसी सकारात्मक संकेत हैं। दूसरी तरफ ऊंचे मूल्यांकन, एआई से जुड़ी सीमित संभावनाएं, धीमी सुधार प्रक्रिया, कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक तनाव बाजार पर दबाव डाल रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में निवेशकों का भरोसा मजबूत करना भारतीय बाजार के लिए बड़ी चुनौती होगी।

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