भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में सुस्ती का माहौल रहा। मासिक एक्सपायरी के दिन बाजार में अस्थिरता देखने को मिली और प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। बेंचमार्क इंडेक्स में गिरावट के बावजूद व्यापक बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही।
कारोबार के अंत में दोनों प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए।
बाजार की इस गिरावट में सबसे बड़ा दबाव आईटी सेक्टर से आया, जिसमें 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इंफोसिस, आईटीसी, एचसीएल टेक, टीसीएस और टाटा स्टील सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल रहे।
सोमवार को दिल्ली सरकार ने वायु गुणवत्ता में सुधार और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी लाने के मकसद से अपनी नई ईवी पॉलिसी की घोषणा की थी। इस पॉलिसी का सीधा असर मंगलवार को ईवी कंपनियों के शेयरों पर दिखा। ओला इलेक्ट्रिक का शेयर 8.37 प्रतिशत उछलकर 43.76 रुपये पर बंद हुआ, जबकि एथर एनर्जी का शेयर 5.24 प्रतिशत चढ़कर 1,140.55 रुपये पर पहुंच गया।
इसके विपरीत, पारंपरिक ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयर दबाव में रहे। आयशर मोटर्स में 4.38 प्रतिशत, भारत फोर्ज में 0.96 प्रतिशत और हीरो मोटोकॉर्प में 0.30 प्रतिशत की गिरावट आई, हालांकि टाटा मोटर्स और बॉश के शेयरों में मामूली बढ़त दर्ज की गई।
मुद्रा बाजार में, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 94.66 पर बंद हुआ, जो पिछले बंद स्तर 94.54 के मुकाबले कमजोर है। हालांकि, मार्च 2025 के बाद यह रुपये की पहली तिमाही दर तिमाही बढ़त है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार के मुताबिक, डॉलर की मजबूत कॉरपोरेट मांग और सेफ-हेवन प्रवाह के कारण लगातार तीसरे सत्र में रुपये में गिरावट आई है।
भले ही बेंचमार्क इंडेक्स ने अपनी गति खो दी, लेकिन व्यापक बाजारों में शानदार हरियाली देखने को मिली।
वैश्विक बाजारों की बात करें तो मिला-जुला असर देखने को मिला:
मासिक एक्सपायरी के दिन बेंचमार्क इंडेक्स में दबाव साफ नजर आया, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों का मजबूत रुझान एक सकारात्मक संकेत है। मुख्य रूप से आईटी सेक्टर की बिकवाली और रुपये की कमजोरी ने बाजार को नीचे की ओर खींचा। अब देखना होगा कि अगले कारोबारी सत्र में घरेलू बाजार वैश्विक संकेतों पर किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं।