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स्टार्टअप इंडिया: जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बन 10 वर्षों में भारत ने बदली तस्वीर, चुनौती को अवसर में बदला

Sat, 17 Jan 2026 07:05 AM IST
निर्मल कांत नवनीत सहगल पूर्व अध्यक्ष, प्रसार भारती

सार

आज का युवा केवल नौकरी की सुरक्षा नहीं बल्कि समस्या का समाधान खोजने की सोच के साथ आगे बढ़ रहा है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फ्रीपिक
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल स्टार्टअप डे के अवसर पर जिस आत्मविश्वास के साथ युवाओं की जोखिम लेने की क्षमता की सराहना की, वह बदलते भारत की आर्थिक सोच को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। उनका यह कहना कि देश के लिए आवश्यक कामों में किसी न किसी को जोखिम उठाना ही होगा और यदि नुकसान भी हो तो वह व्यक्तिगत होगा जबकि लाभ देश का। दरअसल इसी दर्शन ने भारत के स्टार्टअप आंदोलन को नैतिक और वैचारिक आधार दिया है। स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक भारत का युवा वर्ग नौकरी खोजने वाला वर्ग माना गया लेकिन बीते एक दशक में यह सोच निर्णायक रूप से बदली है। आज भारत का युवा केवल रोजगार का आकांक्षी नहीं बल्कि रोजगार सृजन करने वाला बन रहा है। इस परिवर्तन के केंद्र में मोदी सरकार की ‘स्टार्टअप इंडिया’ पहल ने वाकई निर्णायक भूमिका निभाई है, जिसे भारत के आर्थिक भविष्य की एक दूरदर्शी और रणनीतिक नींव के रूप में देखा जाना चाहिए। यही वह ‘टर्निंग पॉइंट’ है जहां से भारत की नई उद्यमशील पीढ़ी और नीतिगत समर्थन की कहानी आगे बढ़ी।
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चुनौती को अवसर में बदला
दरअसल भारत आज उस निर्णायक जनसांख्यिकीय मोड़ पर खड़ा है, जहां उसकी लगभग दो-तिहाई आबादी कामकाजी आयु वर्ग में है। यही युवा शक्ति भारत के लिए सबसे बड़ा अवसर भी है और सबसे बड़ी चुनौती भी। यदि यह ऊर्जा नवाचार, उद्यमिता और उत्पादन में रूपांतरित होती है तो भारत वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने की क्षमता रखता है लेकिन यदि इसे सही मंच और समर्थन न मिले तो यही असंतोष और बेरोजगारी का कारण बन सकती है। इसी चुनौती को अवसर में बदलने के लिए 16 जनवरी 2016 को स्टार्टअप इंडिया मिशन की शुरुआत की गई। सरकार का उद्देश्य स्पष्ट था- नवाचार को बढ़ावा देना, उद्यमिता को संस्थागत समर्थन देना और युवाओं को एक ऐसा नीति-आधारित इकोसिस्टम उपलब्ध कराना, जहां जोखिम उठाना कमजोरी नहीं बल्कि राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया का हिस्सा बने।
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छोटे शहरों में युवा कर रहे कमाल 
स्टार्टअप इंडिया की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल महानगरों तक सीमित नहीं रही। आंकड़ों के अनुसार, लगभग 50 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप्स टियर-2 और टियर-3 शहरों से उभरे हैं। यह तथ्य उस धारणा को तोड़ता है कि नवाचार केवल बड़े शहरों की बपौती है। छोटे शहरों और कस्बों के युवा आज एग्रीटेक, हेल्थटेक, एडटेक, फिनटेक और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में वैश्विक स्तर की कंपनियां खड़ी कर रहे हैं। वित्तीय समर्थन के मोर्चे पर भी सरकार की भूमिका केवल नीतिगत नहीं बल्कि संरचनात्मक रही है। स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम और फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्टअप्स (एफएफएस) इसके प्रमुख उदाहरण हैं। सरकार द्वारा स्थापित फंड ऑफ फंड्स के तहत अब तक 10,000 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी जा चुकी है।
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नीतिगत सुधारों ने बदली सोच
नीतिगत सुधारों ने भी स्टार्टअप संस्कृति को मजबूती दी है। इनकम टैक्स छूट, एंजेल टैक्स में राहत, सेल्फ-सर्टिफिकेशन, तेज़ एग्ज़िट पॉलिसी और पेटेंट व ट्रेडमार्क शुल्क में छूट जैसे निर्णयों ने यह संकेत दिया कि सरकार स्टार्टअप्स को शक की निगाह से नहीं बल्कि भागीदार के रूप में देखती है। हजारों स्टार्टअप्स इन टैक्स और नियामकीय सुविधाओं का लाभ उठा चुके हैं। फिनटेक के क्षेत्र में भारत आज दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट बाजारों में शामिल है। भुगतान प्रणाली ने न केवल वित्तीय समावेशन को गति दी बल्कि सैकड़ों फिनटेक स्टार्टअप्स को जन्म दिया। यह परिवर्तन किसी निजी प्रयोग का परिणाम नहीं बल्कि सरकारी डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर का नतीजा है, जिसे स्टार्टअप इंडिया इकोसिस्टम ने व्यावसायिक समाधान में बदला।




 
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