गांवों और दूर-दराज के रसोई गैस (एलपीजी) के ग्राहकों की सहूलियत के लिए सरकार वहां भी सिलेंडरों की होम डिलीवरी शुरू करने वाली है। इस बारे में योजना लगभग तैयार हो गई है। बस इंतजार है कुछ जरूरी अनुमति की, उसके बाद इसे कार्यरूप दे दिया जाएगा।केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गांवों में भी एलीपीजी सिलेंडर की होम डिलीवरी करवाने की पूरी व्यवस्था की जा रही है। इस समय देशभर के ग्रामीण इलाकों में करीब 5,000 एलपीजी डीलर तो हैं, लेकिन वे ग्राहकों को घर तक सिलेंडर नहीं पहुंचाते। इस समय जो नियम है, उसके मुताबिक ग्रामीण इलाके के डीलर की जिम्मेदारी अपने दुकान या गोदाम से सिलेंडर उपलब्ध कराने की है।
उल्लेखनीय है कि पूर्ववर्ती मनमोहन सरकार ने वर्ष 2009 में राजीव गांधी ग्रामीण एलपीजी वितरण योजना शुरू की थी, जिसके तहत एक ग्रामीण डीलर को अधिकतम 600 ग्राहक बनाने की अनुमति थी। इसी हिसाब से डीलर को महीने में 1,200 रीफिल सिलेंडर उपलब्ध कराए जाते हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में भी सिलेंडरों की होम डिलीवरी की मांग काफी दिनों से उठ रही है और इस पर पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्राथमिकता से काम करने का निर्देश दिया है। इसलिए इस बारे में एक योजना बनाई गई है। इसके तहत ग्रामीण डीलरों को महीने में रीफिल सिलेंडर का कोटा बढ़ाया जा रहा है ताकि उनका टर्नओवर बढ़ सके। जब टर्नओवर बढ़ेगा तो आमदनी भी बढ़ेगी।
इसी बढ़ी हुई आमदनी के बदले डीलरों से एलपीजी सिलेंडर की होम डिलीवरी के लिए कहा जाएगा। इससे पहले एक प्रस्ताव आया था, जिसमें कुछ शुल्क लेकर सिलेंडर की होम डिलीवरी की बात थी, जिसे खारिज कर दिया गया। ग्रामीण एलपीजी डीलरों का कहना है कि एलपीजी गोदाम बनाने के लिए उसे उतना ही निवेश करना होता है, जितना शहरी डीलरों को। इसके बावजूद शहरी डीलरों को महीने में जहां 8-10 हजार रीफिल सिलेंडर मिलता है, वहीं ग्रामीण क्षेत्र में महज 1,200 रीफिल। इसलिए इसकी संख्या बढ़ायी जाए। उल्लेखनीय है कि शहरी एलपीजी डीलरों को 15 किलोमीटर के दायरे में ग्राहक बनाने का अधिकार है। फिर ग्राहक चाहे शहरी क्षेत्र में रहे या ग्रामीण क्षेत्र में, उन्हें होम डिलीवरी देनी पड़ती है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के डीलरों पर यह बाध्यता नहीं है।